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काशी विद्यापीठ में रूसी भाषा एवं संस्कृति कार्यक्रम का आठवां दिन, विद्यार्थियों ने सीखी भाषा की बारीकियां –

 

 

वाराणसी:-  महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग तथा रूस के कोज्मा मीनिन स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रूसी भाषा एवं संस्कृति कार्यक्रम के आठवें दिन विद्यार्थियों को रूसी भाषा, साहित्य, संस्कृति और रूस में उच्च शिक्षा की संभावनाओं की जानकारी दी गई।

रूस से आई विशेषज्ञ प्रोफेसर नतालिया और डॉ. दारिया के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों ने रूसी भाषा के उच्चारण, लय, स्वर-नियंत्रण और कविता वाचन का अभ्यास किया। प्रोफेसर नतालिया ने पिछली कक्षाओं में पढ़ाई गई कविताओं का पुनराभ्यास कराया और विद्यार्थियों को भाव के अनुरूप कविता पढ़ने की तकनीक समझाई। कठिन एवं लंबे रूसी शब्दों के उच्चारण को बेहतर बनाने के लिए टंग-ट्विस्टर का भी अभ्यास कराया गया।

     

इस दौरान प्रसिद्ध रूसी लेखक वालेरी याकोवलेविच ब्रियोसोव की कविता ‘पहली बर्फ’ का वाचन कराया गया। विद्यार्थियों ने कविता को उत्साहपूर्वक पढ़ते हुए रूसी भाषा की लय और भाव को समझने का प्रयास किया।

कार्यशाला में विद्यार्थियों को रूसी भाषा में वाराणसी के इतिहास, संस्कृति और जीवनशैली पर आधारित पाठ भी कराया गया। ‘हर तस्वीर एक कहानी कहती है और हर कहानी वाराणसी से शुरू होती है’ विषय के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने शहर का परिचय रूसी भाषा में देना सीखा। वहीं ‘अतिथि देवो भवः’ की भारतीय परंपरा को रूसी भाषा में व्यक्त करने का भी अभ्यास कराया गया।

सत्र के दौरान प्रोफेसर नतालिया ने रूस में उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी देते हुए बताया कि रूसी भाषा में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई के लिए मॉस्को और निज़नी नोवगोरोद सहित कई शहरों में अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने प्रवेश परीक्षा एवं आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से योग्य विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क शिक्षा के विकल्पों की जानकारी दी। विदेश जाने में असमर्थ विद्यार्थियों के लिए रूसी विश्वविद्यालयों से ऑनलाइन माध्यम से डिग्री पूरी करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

वहीं प्रारंभिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए डॉ. दारिया ने वीडियो माध्यम से रूसी कविता का अभ्यास कराया। कविता में प्रयुक्त नए शब्दों और उनके अर्थों को समझाते हुए विद्यार्थियों की शब्दावली को मजबूत किया गया।

कार्यक्रम के अंत में कविताओं और टंग-ट्विस्टर का पुनरावलोकन कराया गया। दोनों विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए रूसी भाषा के साथ-साथ भारत और रूस की सांस्कृतिक समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अनुभव साबित हुई।

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