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काशी विद्यापीठ में तीन सप्ताह का रूसी भाषा एवं संस्कृति पाठ्यक्रम संपन्न  –

कविता, व्याकरण और दैनिक संवाद के जरिए विद्यार्थियों ने सीखी रूसी भाषा की बारीकियां, रूसी समाचार चैनल पर भी मिला कवरेज -

 

 

नवीन तिवारी –

 

वाराणसी:-  महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग तथा रूस के कोज्मा मिनिन निज़नी नोवगोरोड स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन सप्ताह का रूसी भाषा एवं संस्कृति अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम शनिवार को संपन्न हुआ। पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रूसी भाषा के साथ वहां की संस्कृति, साहित्य, व्याकरण और दैनिक बोलचाल के प्रयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यक्रम के दौरान रूस की विशेषज्ञ अध्यापिकाओं प्रो. नतालिया व्लादिमीरोवना श्मेलेवा और डॉ. दर्या दिमित्रिएवना वारेंसोवा ने विद्यार्थियों को भाषा की बारीकियों से अवगत कराया। एक सत्र में प्रो. नतालिया ने प्रसिद्ध रूसी कवि फिदोर इवानोविच की कविता ‘शरद ऋतु में’ का परिचय कराते हुए उसका कई बार वाचन कराया। विद्यार्थियों को सही उच्चारण, लय और अभिव्यक्ति का अभ्यास कराया गया तथा व्यक्तिगत वाचन के माध्यम से उनकी भाषा दक्षता को निखारा गया।

 

कविता के माध्यम से विद्यार्थियों ने रूसी व्याकरण का भी अभ्यास किया। उन्होंने कविता में प्रयुक्त क्रियाओं और संज्ञा पदों की पहचान करने के साथ विभिन्न कारकों तथा उनके परिवर्तन के नियमों को समझा। नए एवं कठिन शब्दों के अर्थ, सही लेखन और प्रयोग पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

वहीं, डॉ. दर्या ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से दैनिक जीवन में प्रयुक्त संज्ञाओं एवं सर्वनामों का अभ्यास कराया। विद्यार्थियों को शब्दों के सही उच्चारण, लेखन और बोलचाल में उनके प्रयोग का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान भाषा सीखने के चार प्रमुख कौशल—लिसनिंग, स्पीकिंग, रीडिंग और राइटिंग—पर भी विशेष जोर दिया गया।

समापन समारोह की मुख्य अतिथि प्रो. नतालिया व्लादिमीरोवना श्मेलेवा ने काशी प्रवास के अनुभव को आत्मीय एवं अविस्मरणीय बताया। उन्होंने काशी के लोगों, विद्यार्थियों और शिक्षकों से मिले स्नेह एवं सहयोग की सराहना की। विशिष्ट अतिथि डॉ. दर्या दिमित्रिएवना वारेंसोवा ने भी विश्वविद्यालय के आतिथ्य और विद्यार्थियों की सीखने की ललक की प्रशंसा की।

समारोह की अध्यक्षता मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्रा ने की। उन्होंने विद्यार्थियों से अर्जित भाषा ज्ञान का उपयोग संस्थान, समाज और राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया। प्रो. नलिनी श्याम ने कहा कि किसी विदेशी भाषा को प्रभावी ढंग से सीखने के लिए सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने का नियमित अभ्यास आवश्यक है।

समापन समारोह में विद्यार्थियों ने रूसी भाषा में समूह गीत और कविताओं की प्रस्तुति दी। महान रूसी कवि अलेक्जेंडर पुष्किन की कविता का भी सस्वर पाठ किया गया। विद्यार्थियों ने तीन सप्ताह के दौरान आयोजित गतिविधियों पर आधारित वीडियो और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।

कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि काशी विद्यापीठ के विद्यार्थियों को रूसी समाचार चैनल पर भी कवरेज मिला। विश्वविद्यालय परिवार ने इसे भारत-रूस के अकादमिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम का स्वागत विभागाध्यक्ष एवं समन्वयक डॉ. नीरज धनकड़ ने किया। संचालन प्रियांशी मिश्रा और सुंदरी मौर्य ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किरण सिंह ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

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