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रूसी कविता, व्याकरण और उच्चारण के अभ्यास से सजा काशी विद्यापीठ का छठवां दिन –

 

वाराणसी-  महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग तथा रूस के कोज्मा मीनिन स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रूसी भाषा एवं संस्कृति आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम के छठवें दिन विद्यार्थियों ने रूसी कविता, व्यावहारिक व्याकरण और कठिन उच्चारण अभ्यास के जरिए भाषा की बारीकियों को समझा।

दिन की शुरुआत रूसी कविता के अध्ययन से हुई। रूसी भाषा के डिप्लोमा एवं एडवांस डिप्लोमा के विद्यार्थियों के लिए आयोजित विशेष शैक्षणिक सत्र का संचालन रूस से आईं विशेषज्ञ प्रोफेसर नतालिया ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को रूसी साहित्य, व्याकरण तथा उच्चारण सुधार से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक अभ्यास कराए।

कक्षा के प्रारंभ में प्रसिद्ध रूसी कवि अफानासी अफानासियेविच फेत की चर्चित कविता “मैं तुम्हारे पास एक संदेश लेकर आया हूं” का रूसी भाषा में अध्ययन कराया गया। प्रोफेसर नतालिया ने पहले कविता का शुद्ध उच्चारण एवं लयबद्ध वाचन किया और इसके बाद कविता के भावार्थ को विद्यार्थियों के सामने सरलता से स्पष्ट किया।

सामूहिक पाठ के बाद प्रत्येक विद्यार्थी से व्यक्तिगत रूप से कविता का वाचन कराया गया। उच्चारण की शुद्धता, प्रवाह और लय को बेहतर बनाने के लिए इस अभ्यास को कई बार दोहराया गया। इससे विद्यार्थियों को रूसी भाषा के शब्दों के सही उच्चारण और बोलने के आत्मविश्वास को विकसित करने का अवसर मिला।

सत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा रूसी व्याकरण के गहन अभ्यास पर केंद्रित रहा। विद्यार्थियों को संज्ञाओं को सजीव एवं निर्जीव, व्यक्तिवाचक एवं जातिवाचक, लिंग तथा वचन के आधार पर वर्गीकृत करना सिखाया गया। इसके साथ ही वाक्य में प्रयुक्त पूर्वसर्ग और प्रत्ययों के अनुसार संज्ञाओं को विभिन्न कारकों में परिवर्तित करने का अभ्यास कराया गया।

शिक्षण प्रक्रिया को क्रमबद्ध और सहज बनाने के लिए पहले एकल संज्ञाओं, फिर वाक्य आधारित संज्ञाओं तथा इसके बाद एक साथ दो से तीन संज्ञाओं को जटिल श्रेणियों और कारकों में परिवर्तित करने का अभ्यास कराया गया। विद्यार्थियों को विशेषणों की पहचान तथा उनके लिंग, वचन और कारक के अनुसार संज्ञाओं के साथ समन्वय स्थापित करने की तकनीक भी समझाई गई।

अभ्यास के दौरान विद्यार्थियों द्वारा की गई त्रुटियों को प्रोफेसर नतालिया ने तत्काल ठीक किया और उनके सवालों एवं संदेहों का सहज तरीके से समाधान किया। इससे विद्यार्थियों को व्याकरण के जटिल नियमों को व्यावहारिक रूप से समझने में मदद मिली।

कक्षा में टंग ट्विस्टर का अभ्यास भी कराया गया। पूर्व में पढ़ाए गए टंग ट्विस्टर का पुनरावलोकन करने के साथ विद्यार्थियों को कुछ नए और कठिन टंग ट्विस्टर भी सिखाए गए। शुरुआत में कठिन प्रतीत होने वाले इन शब्दों का लगातार अभ्यास प्रोफेसर नतालिया की रोचक शिक्षण शैली के कारण विद्यार्थियों के लिए मनोरंजक बन गया।

“करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान” की कहावत को चरितार्थ करते हुए विद्यार्थियों ने बार-बार अभ्यास के माध्यम से कठिन रूसी शब्दों के सटीक उच्चारण में सफलता हासिल की।

वहीं, डॉ. दार्या ने शुरुआती स्तर के शिक्षार्थियों को रूसी भाषा के स्वर एवं व्यंजन के उच्चारण को सरल, सहज और रोचक तरीकों से समझाया। इससे नए विद्यार्थियों को रूसी भाषा के मूल उच्चारण को समझने में विशेष मदद मिली।

सत्र के अंतिम चरण में दिनभर पढ़ाई गई कविता का एक बार फिर सामूहिक वाचन कराया गया। पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के आयोजकों के अनुसार, इस व्यावहारिक एवं संवादात्मक शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों के रूसी भाषा के प्रति आत्मविश्वास, उच्चारण कौशल और व्याकरण संबंधी समझ में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

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