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रूसी भाषा सीखने में रचनात्मकता का रंग, काशी विद्यापीठ में 10वें दिन विद्यार्थियों ने सीखे भाषा और संस्कृति के नए आयाम —

 

 

 

वाराणसी:-  महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग तथा रूस की कोज्मा मीनिन स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रूसी भाषा एवं संस्कृति कार्यक्रम के 10वें दिन कक्षाओं में रचनात्मकता, व्याकरणिक शुद्धता और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का अनूठा संगम देखने को मिला। रूस से आईं प्रोफेसर नतालिया और डॉ. दारिया के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने रूसी भाषा के साथ डिजिटल और कला आधारित शिक्षण पद्धतियों को भी समझा।

कक्षा की शुरुआत पूर्व में पढ़ाई गई कविताओं के संगीतमय पुनरावलोकन से हुई। इसके बाद प्रसिद्ध रूसी कवि अफ़नासी अफ़नासेविच फेत की कविता “मैं कुछ नहीं कहूंगा” का पठन कराया गया। प्रो. नतालिया ने विद्यार्थियों के कविता पाठ की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई और उच्चारण संबंधी त्रुटियों को मौके पर ही ठीक कराया।

इसके बाद विद्यार्थियों ने कविता में प्रयुक्त संज्ञा और क्रिया शब्दों की पहचान की। रूसी भाषा की जटिल व्याकरणिक संरचना के तहत क्रियाओं के रूप, उनके पक्षीय युग्म तथा प्रथम और द्वितीय प्रकार की कंजुगेशन पर विस्तार से चर्चा हुई। विद्यार्थियों को अपवाद स्वरूप प्रयोग होने वाली क्रियाओं की सूची भी उपलब्ध कराई गई। रूसी उच्चारण को बेहतर बनाने के लिए टंग ट्विस्टर्स का अभ्यास भी कराया गया।

प्रो. नतालिया ने विद्यार्थियों को रूस के प्रमुख विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने सशुल्क शिक्षा के साथ छात्रवृत्ति आधारित निःशुल्क शिक्षा तथा ऑनलाइन माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई के विकल्पों के बारे में भी बताया।

वहीं शुरुआती स्तर के विद्यार्थियों की कक्षा में डॉ. दारिया ने रूसी लोककथा ‘कलोबोक’ के माध्यम से भाषा शिक्षण को रोचक बनाया। कहानी के जरिए विद्यार्थियों को नए रूसी शब्दों के साथ प्रकृति, पशु-पक्षियों और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी शब्दावली सिखाई गई। विद्यार्थियों ने कहानी के आधार पर चित्र भी बनाए, जिससे भाषा को दृश्य माध्यम से समझने में मदद मिली।

बाद में दोनों शिक्षिकाओं ने डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा के विद्यार्थियों को ‘कलोबोक’ से संबंधित वीडियो भी दिखाए।

वीडियो रिकॉर्डिंग, आर्ट-बेस्ड लर्निंग, व्याकरणिक अभ्यास और उच्च शिक्षा संबंधी मार्गदर्शन के कारण कार्यक्रम का 10वां दिन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, रचनात्मक और प्रेरणादायक रहा।

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