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भगवान शिव की नगरी में गूंजा जय श्रीराम, रावण जन्म के प्रसंग से शुरू हुई विश्व प्रसिद्ध रामनगर रामलीला –

 

 

रामलीला के पहला दिवस – 

वाराणसी:- 200 पुरानी  विश्व-प्रसिद्ध ऐतिहासिक रामनगर की रामलीला भगवान शिव की नगरी काशी में शुक्रवार को रामलीला का भव्य शुभारंभ हुआ। जो एक महीने तक चलती है।  इसमें कोई एक स्थायी मंच नहीं होता, बल्कि पूरा रामनगर शहर ही अलग-अलग प्रसंगों (अयोध्या, जनकपुर, लंका आदि) के लिए जीवंत मंच बन जाता है। यहां आधुनिक माइक, लाउडस्पीकर या बिजली की कृत्रिम रोशनी का उपयोग नहीं किया जाता है; लालटेन (पेट्रोमेक्स) और पारंपरिक शैली में संवाद होते हैं।

       

 

 

रामलीला के पहले दिन भगवान श्रीराम का स्वरूप प्रकट, रावण के जन्म, उसके अत्याचार और देवताओं द्वारा क्षीर सागर में भगवान विष्णु से रक्षा की गुहार लगाने के प्रसंग का मंचन हुआ –

   

रामनगर की हर डगर राममय नजर आई और लीला स्थल पर हर-हर महादेव के साथ जय श्रीराम और जय सियाराम के उद्घोष गूंजते रहे। रामलीला के प्रथम दिन रावण जन्म, उसके भाइयों का घोर तप, ब्रह्मा से वरदान प्राप्ति, अत्याचार और देवताओं द्वारा भगवान विष्णु से प्रार्थना तक के प्रसंगों का मंचन हुआ।

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मुक्ताकाशीय मंच पर आयोजित रामलीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में नेमी और श्रद्धालु पहुंचे। एक वर्ष बाद रामलीला स्थल पर पहुंचे लीलाप्रेमियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने एक-दूसरे का अभिवादन करते हुए गले मिलकर कुशलक्षेम जाना। गंगातट और आसपास के सरोवरों एवं तालाबों के किनारे श्रद्धालुओं ने अपना डेरा जमाया। पूरे लीला क्षेत्र में इत्र की खुशबू, चंदन और रामचरितमानस के पाठ के बीच भक्ति का वातावरण बना रहा।

 

   

रामलीला के प्रथम दिन रावण अपने भाइयों कुंभकरण और विभीषण के साथ घोर तप करता है। तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट होते हैं और तीनों भाइयों को वरदान देते हैं। रावण मनुष्य और वानर को छोड़कर लगभग अमरत्व का वर मांगता है, कुंभकरण निद्रा का वरदान और विभीषण भगवान की भक्ति मांगते हैं।

वरदान प्राप्त करने के बाद रावण के अत्याचार बढ़ जाते हैं। वह कुबेर से पुष्पक विमान छीन लेता है। उसका पुत्र मेघनाद देवराज इंद्र को पराजित कर इंद्रजीत की उपाधि प्राप्त करता है। रावण के अत्याचार इतने बढ़ जाते हैं कि राज्य में वेद-पुराण, श्राद्ध और हवन आदि पर भी रोक लगा दी जाती है। साधु-संतों और देवताओं पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ने लगता है।

रावण के अत्याचार से धरती व्यथित होकर गौ रूप धारण कर ब्रह्मा जी के पास पहुंचती है। इसके बाद भयभीत देवता और ऋषि भगवान विष्णु की शरण में पहुंचकर उनकी स्तुति करते हैं। कथा में भगवान शिव के माध्यम से भगवान विष्णु की सर्वव्यापकता का संदेश भी सामने आता है—

“हरि व्यापक सर्वत्र समाना।
प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना॥”

देवताओं की स्तुति के बाद आकाशवाणी होती है कि भगवान विष्णु अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर श्रीराम के रूप में अवतार लेंगे और धरती को राक्षसों के अत्याचार से मुक्त करेंगे। इसी के साथ प्रथम प्रसंग को विराम दिया गया।

क्षीर सागर में बदला रामबाग पोखरा – 

रामलीला के दूसरे प्रसंग में रामबाग पोखरा लाल-श्वेत महताबी की रोशनी से जगमगा उठा। पोखरा को क्षीर सागर का स्वरूप दिया गया और शेषनाग की शैय्या पर विराजमान भगवान श्रीहरि विष्णु की मनोहारी झांकी सजाई गई। भगवान विष्णु के चरण दबातीं माता लक्ष्मी और उनकी नाभि से निकले कमल पर विराजमान ब्रह्मा जी की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

झांकी की आरती के दौरान पूरा रामलीला क्षेत्र हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। रामायणी जनों द्वारा मृदंग और झाल के साथ “मंगल भवन अमंगल हारी” का गायन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य आध्यात्मिक अनुभूति से कम नहीं रहा।

कहा गया कि वर्षा और तेज हवाओं के बीच भी रामलीला का आयोजन भक्ति और परंपरा के साथ आगे बढ़ा। रामनगर की इस लीला के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौसम भी लीला प्रेमियों के उत्साह को कम नहीं कर सका।

 

रामनगर की यह पारंपरिक रामलीला शरद पूर्णिमा तक चलने वाली लीला श्रृंखला के साथ आगे बढ़ेगी, जिसमें प्रतिदिन रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

 

 

हर-हर महादेव।
जय श्रीराम।
जय सियाराम।

 

 

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