अर्नब के बाद अब ‘मुरासु’ का कहर! आंध्र तट की ओर बढ़ रहा समुद्री तूफान, भारी बारिश और बाढ़ का बड़ा खतरा –
80-110 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, कई जिलों में रेड अलर्ट; 300 मिमी तक बारिश की चेतावनी -

नई दिल्ली:- बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर समुद्र उफान पर है और मौसम का मिजाज खतरनाक होता जा रहा है। चक्रवात अर्नब के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं हैं कि अब एक नया समुद्री तूफान ‘मुरासु’ तटीय राज्यों के लिए चिंता का कारण बन गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी दी है कि समुद्र में बना गहरा दबाव तेजी से शक्तिशाली चक्रवाती तूफान में बदल रहा है और अगले कुछ घंटों में आंध्र प्रदेश के तटों से टकरा सकता है।
तूफान के संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है, जबकि तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
क्या है ‘मुरासु’?
दिलचस्प बात यह है कि इस चक्रवात का नाम भारत ने सुझाया है। ‘मुरासु’ तमिल भाषा का एक प्राचीन शब्द है, जिसका अर्थ है ‘ढोल’। प्राचीन राजाओं के समय इस ढोल का इस्तेमाल जनता को महत्वपूर्ण सूचनाएं देने और आपदा की चेतावनी पहुंचाने के लिए किया जाता था। ठीक उसी तरह यह चक्रवात भी अपने आने से पहले खतरे की घंटी बजा रहा है।
तेज हवाएं और उफनता समुद्र
मौसम विभाग के अनुसार, तूफान के प्रभाव से तटीय इलाकों में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं हवा के झोंकों की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। समुद्र में ऊंची और खतरनाक लहरें उठेंगी, जिससे समुद्री गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
असली खतरा हवाएं नहीं, मूसलाधार बारिश
हालांकि मुरासु की रफ्तार चक्रवात अर्नब जितनी नहीं मानी जा रही, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे खतरनाक पहलू भारी बारिश है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में 200 से 300 मिलीमीटर तक अत्यधिक वर्षा हो सकती है। इतनी बारिश नदियों और नालों को उफान पर ला सकती है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ और व्यापक जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
इन जिलों पर सबसे ज्यादा खतरा
लैंडफॉल के दौरान आंध्र प्रदेश के कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और नेल्लोर जिलों को सबसे अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। इन क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
कई राज्यों में दिखेगा असर
मुरासु का असर सिर्फ आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे में भी भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं तूफान कमजोर पड़ने के बाद इसका प्रभाव उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के मौसम पर भी देखने को मिल सकता है, जहां रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है।
फैक्ट फाइल
- चक्रवात का नाम: मुरासु
- अर्थ: चेतावनी देने वाला प्राचीन ढोल
- हवा की गति: 80-90 किमी/घंटा
- अधिकतम झोंके: 110 किमी/घंटा तक
- अनुमानित वर्षा: 200-300 मिमी
- सबसे ज्यादा खतरा: आंध्र प्रदेश के तटीय जिले
- मछुआरों को समुद्र में जाने से परहेज की सलाह
अर्नब के बाद अब मुरासु की दस्तक ने तटीय राज्यों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल सभी की नजरें समुद्र और मौसम विभाग के अगले अपडेट पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं।



