अयोध्या
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: बड़े सुरक्षित, छोटे फंसे; जमीन सौदों में भी करोड़ों का खेल” —
चंपत राय–अनिल मिश्रा बचाए गए, बैंक अधिकारी भी बाहर; एफआईआर में सिर्फ छोटी मछलियां --

अयोध्या :—- अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। एफआईआर में सिर्फ छोटे कर्मियों के नाम हैं,जबकि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी चंपत राय,अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव का कहीं जिक्र नहीं है। बैंक अधिकारियों को भी बेदाग बताया गया है। सवाल उठ रहा है कि जब चोरी में बड़े पदाधिकारियों के करीबियों की भूमिका सामने आई,तो जिम्मेदारी उनसे क्यों नहीं तय की गई।
मुख्य बिंदु: —
- लीपापोती का आरोप: ट्रस्ट ने खुद छानबीन कर रकम बरामद की, लेकिन एफआईआर दर्ज करने में देर की।
- बैंक की भूमिका: संविदाकर्मियों के सहारे गणना कराई गई, जिनमें पदाधिकारियों के करीबी शामिल थे। फिर भी किसी बैंक अधिकारी पर केस नहीं।
- विहिप की चिंता: विवाद बढ़ने पर विहिप और ट्रस्ट की बंद कमरे में बैठक हुई। साख बचाने के लिए बड़े फैसले की चर्चा।
- सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 29 जून को मामला उठाने को कहा। मांग है कि सीबीआई के नेतृत्व में एसआईटी जांच हो।
- राजनीतिक हमला: अरविंद केजरीवाल ने कहा—”भगवान के घर में डाका पड़ा, एसआईटी बड़े लोगों को बचा रही है।”
- संजय सिंह का खुलासा: जमीन खरीद-फरोख्त में भी घोटाले का आरोप। 2 करोड़ की जमीन मिनटों में 18.5 करोड़ में ट्रस्ट को बेची गई।
मामला सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन सौदों तक जा पहुंचा है। छोटे कर्मियों पर कार्रवाई से विवाद शांत करने की कोशिश हो रही है, लेकिन बड़े नामों पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।


