वाराणसीपूर्वांचल

मेडलियन ज्वेलर्स के कार्यक्रम पर उठे सवाल, निवेशकों के हंगामे के बीच कंपनी पर करोड़ों की ठगी के आरोप – 

 

 

वाराणसी:- भारत में “मेडेलियन ज्वैलर्स” के नाम से काम करने वाली कंपनियों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में मुख्य रूप से निवेश या फ्रेंचाइजी घोटाले शामिल हैं, न कि केवल खुदरा धोखाधड़ी। उत्तरी भारत (जैसे कि हिसार, हरियाणा) में स्थानीय पुलिस ने ऐसे मामले दर्ज किए हैं, जहां पीड़ितों को सोने में निवेश और “गोल्ड लोन फ्रेंचाइजी” योजनाओं में फंसाया गया, जिसमें दोगुना पैसा और उच्च कैशबैक रिटर्न का वादा किया गया था।

मेडलियन ज्वैलर्स से जुड़ी प्रमुख जानकारियाँ और घोटाले फ्रैंचाइज़ और निवेश घोटाला: – आर्थिक अपराध शाखा जैसी जांचों ने धोखाधड़ी वाले संचालन (जैसे, मेडेलियन ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड) का पर्दाफाश किया, जहां एजेंटों और निदेशकों ने निवेशकों को निवेश पर गारंटीकृत रिटर्न, कैशबैक और भौतिक सोना देने का वादा किया था।

कार्यप्रणाली: पीड़ितों को उनके शहर में “पहले आईडी/फ्रेंचाइजी” बनने के वादे के जरिए लुभाया जाता था, लेकिन प्रमोटर पैसे लेकर पूरी तरह से कारोबार बंद कर देते थे, जिसके चलते दिल्ली, गुरुग्राम और हरियाणा में गिरफ्तारियां और चल रहे कानूनी मामले सामने आए। 

वाराणसी में आयोजित MEDELLION JEWELLERS के वार्षिक कार्यक्रम के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निवेशकों ने हंगामा करते हुए कंपनी पर कथित तौर पर पोंजी स्कीम के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया।

 

कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार में वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, मेयर सहित कई भाजपा नेताओं की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई थीं। इसे लेकर अब चर्चा तेज हो गई है कि क्या इन प्रमुख चेहरों का इस्तेमाल निवेशकों का भरोसा जीतने और उन्हें निवेश के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया था।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुलिस कमिश्नर ने कार्यक्रम में शामिल होने की स्वीकृति दी थी, तो क्या आयोजन करने वाली कंपनी की पृष्ठभूमि और गतिविधियों का आवश्यक सत्यापन किया गया था? वहीं यदि उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी थी, तो फिर कंपनी ने उनके फोटो और नाम का प्रचार सामग्री व बड़े-बड़े होर्डिंग्स में उपयोग किस आधार पर किया?

निवेशकों के आरोपों के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। यदि कंपनी पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह भी जांच का विषय होगा कि प्रचार में इस्तेमाल किए गए प्रभावशाली चेहरों की भूमिका क्या थी और क्या उनके नाम का उपयोग नियमों के अनुरूप किया गया था।

फिलहाल कंपनी की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

भारत में आभूषण धोखाधड़ी के व्यापक रुझान
यदि आप आभूषणों में निवेश या खरीदारी का मूल्यांकन कर रहे हैं, तो देश भर में होने वाले आम घोटालों से सावधान रहें:
  • “अत्यंत आकर्षक” योजनाएँ: धोखेबाज़ सोने और चांदी पर भारी मासिक या साप्ताहिक रिटर्न की गारंटी देकर निवेशकों को लुभाते हैं। ये आम तौर पर पिरामिड या पोंजी योजनाओं के रूप में काम करती हैं जो अंततः बंद हो जाती हैं, जैसा कि हाल ही में केरल और मुंबई में धोखेबाज़ ज्वैलरी समूहों से जुड़े ₹1,000 करोड़ के घोटालों में देखा गया है।
  • नकली हॉलमार्किंग: कम कैरेट या पीतल के आभूषणों पर नकली बीआईएस हॉलमार्क लगाने और नकली प्रमाणन पत्र बनाने में बदमाशों को पकड़ा गया है।

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