“भारत कोई धर्मशाला नहीं है”: अमित शाह ने घुसपैठियों पर जताई सख्ती, कहा- देश की सुरक्षा और जनसांख्यिकी के लिए बड़ा खतरा –

दिल्ली:- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठ को लेकर सख्त रुख दोहराते हुए कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां कोई भी आकर रह सकता है। उन्होंने कहा कि देश में रहने का अधिकार नागरिकों को है और अवैध घुसपैठिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकी के लिए खतरा हैं।
खुफिया ब्यूरो (IB) के राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन (NSS) के समापन सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पिछले आठ महीनों में सभी स्थल सीमाओं से लगे राज्यों का दौरा करने के बाद केंद्र ने राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा को लेकर चार-सूत्रीय दृष्टिकोण का दस्तावेज साझा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है।
गृह मंत्री ने कहा कि, विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा और संसाधनों की असुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, बढ़ते कट्टरपंथ और साइबर मिसइंफॉर्मेशन जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत की सुरक्षा नीति को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों के बीच रीयल-टाइम सूचना साझा करना जरूरी है। सम्मेलन में घुसपैठ, आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई तथा उनके रसद और वित्तीय नेटवर्क को कमजोर करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
अमित शाह इससे पहले 27 मार्च को लोकसभा में आव्रजन एवं विदेशी विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान भी कह चुके हैं कि भारत ऐसा देश नहीं है जहां कोई भी व्यक्ति किसी भी उद्देश्य से आकर रह सकता है। उन्होंने कहा था कि वैध तरीके से भारत की समृद्धि में योगदान देने वालों का स्वागत है, लेकिन अवैध रूप से प्रवेश करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
गृह मंत्री ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद जैसी चुनौतियों का समय रहते अनुमान लगाया गया होता तो देश को लंबे समय तक इनके परिणाम नहीं भुगतने पड़ते। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा से जुड़े तीन प्रमुख हॉटस्पॉट की चुनौतियों को समाप्त करने में राज्य पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार की सख्ती के बीच गृह मंत्री का यह बयान देश की सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासियों की पहचान व कार्रवाई को लेकर केंद्र की प्राथमिकता को स्पष्ट करता है।



