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शिलॉन्ग में फिर भड़की हिंसा, असम नंबर की गाड़ियों को बनाया निशाना; पेट्रोल बम हमलों से दहशत –

 

 

दिल्ली:-   शिलॉन्ग। मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) की ब्लैक-फ्लैग बाइक रैली के दौरान शुरू हुई हिंसा के बाद वाहनों में तोड़फोड़, आगजनी और लोगों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। बड़ी संख्या में क्षतिग्रस्त वाहनों में असम रजिस्ट्रेशन वाले वाहन भी शामिल बताए जा रहे हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, 21 अगस्त को शिलॉन्ग के Nongmynsong पुलिस आउटपोस्ट पर पेट्रोल बम फेंके जाने की घटना सामने आई। इसके अलावा सरकारी कार्यालयों और वाहनों को भी निशाना बनाया गया। इन घटनाओं में तत्काल किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली, लेकिन लगातार हो रही आगजनी और हमलों से इलाके में तनाव बना हुआ है।

इससे पहले 19 अगस्त को KSU की बाइक रैली हिंसक हो गई थी। पुलिस के अनुसार इस दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई और कुछ सरकारी वाहनों को आग के हवाले किया गया। एक पर्यटक वाहन में सवार परिवार ने भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनकी गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए, जबकि वाहन में बच्चा भी मौजूद था।

हिंसा के बाद असम और मेघालय के बीच सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। असम के टैक्सी और व्यावसायिक वाहन चालकों ने खानापारा और जोरबाट जैसे प्रवेश मार्गों पर विरोध में आवाजाही बाधित की। इससे दोनों राज्यों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

मामले की पृष्ठभूमि में शिलॉन्ग के Mawlai इलाके में एक खासी व्यक्ति की हत्या का मामला बताया जा रहा है। इस घटना में कथित तौर पर असम नंबर के वाहन और कुछ संदिग्धों का जिक्र सामने आने के बाद KSU ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन के दौरान असम नंबर वाले वाहनों को निशाना बनाए जाने के आरोप लगे।

लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र ने मेघालय में चार CRPF कंपनियां और एक RAF कंपनी तैनात की है, जिन्हें कानून-व्यवस्था संभालने में राज्य पुलिस की सहायता के लिए लगाया गया है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक आपराधिक घटना के विरोध का गुस्सा आम नागरिकों, पर्यटकों और दूसरे राज्य के वाहनों पर क्यों निकाला जा रहा है? प्रशासन के सामने चुनौती है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ असम-मेघालय के बीच बढ़ते तनाव को भी जल्द नियंत्रित किया जाए।

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