दिल्ली
Trending

चीनी के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी, 2 महीने में करीब 40% उछाल –

सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को दी मंजूरी - 

 

 

 

दिल्ली:- देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब दो महीनों में घरेलू चीनी कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी प्रमुख वजह घरेलू उत्पादन में कमी, सीमित स्टॉक और आगामी त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की आशंका बताई जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 18 अगस्त को खुदरा चीनी की औसत कीमत 52.30 रुपये प्रति किलो थी, जबकि एक साल पहले यह 46.34 रुपये प्रति किलो थी। वहीं, मिल स्तर पर चीनी की औसत कीमत करीब 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है, जो पिछले साल लगभग 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी।

चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। करीब एक दशक बाद भारत ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए इस तरह बड़े पैमाने पर चीनी आयात का रास्ता खोला है।

 

कम उत्पादन और घटते स्टॉक ने बढ़ाई चिंता –

मौजूदा तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता है। मौसम संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियों से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है, जबकि चीनी सीजन के अंत में स्टॉक भी दबाव में है। इसी बीच अगस्त से अक्टूबर के दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के कारण मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है।

 

रिपोर्टों के मुताबिक प्रमुख बाजारों में खुदरा चीनी की कीमतों में 7 अगस्त के बाद 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। वहीं मिल स्तर पर चीनी की कीमतें भी पिछले साल की तुलना में काफी ऊपर पहुंच गई हैं।

 

जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी सख्त :-

सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए बड़े थोक उपभोक्ताओं के चीनी स्टॉक पर भी अंकुश लगाया है। 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ता अधिकतम 15 दिन की जरूरत के बराबर स्टॉक रख सकेंगे। इससे पहले डीलरों के लिए 30 दिन की स्टॉक सीमा तय की गई थी।

 

क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी?

चीनी की कीमतों में तेजी के बीच इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को भी वजह बताया जा रहा है, लेकिन केंद्र सरकार ने हालिया कीमत वृद्धि को इथेनॉल के लिए चीनी डायवर्जन से जोड़ने से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा तेजी के पीछे कम उत्पादन, मौसम का असर, सीमित उपलब्धता, बढ़ती मांग और जमाखोरी जैसे कारक प्रमुख हैं।

 

सरकार के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले से बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आने की उम्मीद है। हालांकि आयातित चीनी का बड़ा हिस्सा भारत पहुंचने में समय ले सकता है, इसलिए तत्काल राहत की बजाय आने वाले हफ्तों में इसका असर ज्यादा स्पष्ट होने की संभावना है।

मुख्य कारण – 
  • मौसम की मार: प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों (जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक) में कम बारिश और सूखे से पैदावार कम हुई है।
  • त्योहारी मांग: रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी और दिवाली जैसे त्योहारों से पहले मांग और एडवांस बुकिंग बढ़ जाती है।
  • अंतरराष्ट्रीय दबाव: वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति घटने से अंतरराष्ट्रीय कीमतें तेज हुई हैं।
  • एथेनॉल की चर्चा: पेट्रोल में मिलाने के लिए गन्ने के रस का उपयोग होने से बाजार में गन्ने की उपलब्धता को लेकर चर्चा है, हालांकि सरकार का कहना है कि कुल असर सीमित है और ज्यादातर एथेनॉल मक्का आदि से बन रहा है।
सरकार के कदम :- 
बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने डीलरों पर स्टॉक लिमिट तय की है और ड्यूटी-फ्री चीनी के आयात को मंजूरी दी है। 

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

You cannot copy content of this page