ग्लोबल वॉर्मिंग का कहर: यूरोप में रिकॉर्डतोड़ गर्मी, 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत; बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित –

नई दिल्ली:- जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर अब दुनिया भर में और अधिक गंभीर होता जा रहा है। इस साल यूरोप ने रिकॉर्डतोड़ गर्मी का सामना किया, जिसके चलते पूरे महाद्वीप में करीब 10 हजार लोगों की जान चली गई। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, जून के अंतिम सप्ताह में तापमान में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने हालात और बिगाड़ दिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी से होने वाली कई मौतें आधिकारिक रिकॉर्ड में सीधे गर्मी से नहीं जोड़ी जातीं। कई मामलों में गर्मी के कारण दिल का दौरा या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र में कारण कुछ और दर्ज किया जाता है। सबसे अधिक खतरा 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों पर देखा गया।
यूरोएमओएमओ (EuroMOMO) के आंकड़ों के अनुसार, 28 जून को समाप्त सप्ताह में लगभग 14,260 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 12 हजार से अधिक मौतें 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की थीं।
देशवार स्थिति –
- स्पेन: भीषण गर्मी से 937 लोगों की मौत
- बेल्जियम: 18 जून से 1 जुलाई के बीच 1,747 अतिरिक्त मौतें
- नीदरलैंड: करीब 480 मौतें
- जर्मनी: जुलाई की शुरुआत तक 6,830 मौतें, जिनमें 6,470 बुजुर्ग
- ब्रिटेन: मई-जून में इंग्लैंड और वेल्स में करीब 2,700 मौतें
- फ्रांस: 22 से 28 जून के बीच पिछले सप्ताह की तुलना में 2,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की तीव्रता और आवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जिससे भविष्य में ऐसे हालात और गंभीर हो सकते हैं। सरकारों को हीट एक्शन प्लान, स्वास्थ्य सेवाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।



