150 गांवों की जीवनरेखा बनी मौत का रास्ता! हजारों ग्रामीण रोज़ जोखिम उठाने को मजबूर —
रोहित नंदन मिश्र –
सतना (मध्यप्रदेश): मध्यप्रदेश के सतना जिले में जिस सड़क से रोज़ करीब 2,000 लोग और 100 से 150 गांवों के ग्रामीण आवागमन करते हैं, वही सड़क आज गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हालत ऐसी है कि कई जगह यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। बरसात के दौरान पानी भर जाने से हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग की जा रही है। पंचायत से लेकर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक कई बार शिकायतें पहुंचीं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि खराब सड़क के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं, फिर भी जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के सतना दौरे के दौरान ग्रामीणों ने सांसद, विधायक, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के सामने भी सड़क निर्माण की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि करीब 150 गांवों की जीवनरेखा है, जिसकी बदहाली से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है।


फाइल फोटो: 08 अप्रैल 2026 को जिगनहट नदी पर बनने वाले नवीन एनीकट भूमि पूजन करते कैबिनेट मंत्री एवं सतना जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय।
गौरतलब है कि 08 अप्रैल 2026 को प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जिगनहट नदी पर बनने वाले नवीन एनीकट का भूमि पूजन किया था। उसी दौरे के दौरान ग्रामीणों ने जिगनहट–महदेवा मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर उन्हें लिखित ज्ञापन भी सौंपा था।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब हजारों लोगों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है, तो आखिर सड़क निर्माण में देरी क्यों? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग की नींद खुलेगी?
सड़क निर्माण की मांग को लेकर महीनों पहले दिया गया था ज्ञापन, फिर भी ग्रामीणों का आरोप—नहीं हुई सुनवाई —

जिगनहट से महदेवा मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 8 अप्रैल 2026 को प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लिखित आवेदन सौंपा था। आवेदन में बताया गया कि यह मार्ग करीब 150 गांवों को जोड़ता है और इसकी जर्जर स्थिति के कारण लोगों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। उनका आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को ज्ञापन देने के बावजूद सड़क की स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। बरसात के मौसम में सड़क पर बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है।
अब सवाल यह है कि जब ग्रामीण महीनों पहले लिखित आवेदन देकर सड़क निर्माण की मांग कर चुके हैं, तो आखिर इस पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।



