
वाराणसी :– धर्म, आस्था और अध्यात्म की नगरी काशी में अवैध जुआ और सट्टे के कारोबार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के कई इलाकों में लंबे समय से जुए के फड़ संचालित हो रहे हैं, जिससे युवाओं का भविष्य दांव पर लग रहा है और सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
जुआ केवल पैसों का खेल नहीं, बल्कि कई परिवारों की आर्थिक बर्बादी, कर्ज, विवाद और अपराधों की वजह भी बनता है। आसान कमाई के लालच में युवा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं, जिससे चोरी, मारपीट और अन्य अपराधों की घटनाओं में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जाती है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जैतपुरा, लंका, सिगरा, कैंट, रोहनिया, मंडुवाडीह, चेतगंज और आसपास के कुछ इलाकों में अवैध जुए के अड्डे संचालित होने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। यदि ऐसा है तो बड़ा सवाल यह है कि क्या इन शिकायतों की जांच हुई है और क्या संबंधित क्षेत्रों में प्रभावी कार्रवाई की गई है?
काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत, संस्कृति और सभ्यता है। ऐसे में यदि अवैध गतिविधियां पनप रही हैं तो यह केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि शहर की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा विषय है। जरूरत है कि पुलिस और प्रशासन शिकायतों की निष्पक्ष जांच करें, दोषियों पर कार्रवाई करें और नागरिक भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना जिम्मेदारी के साथ संबंधित अधिकारियों को दें।
काशी की पहचान आस्था, संस्कृति और सदाचार से है—अवैध जुआ और सट्टे से नहीं। यदि आरोप सही हैं, तो उन पर सख्त कार्रवाई होना जनहित में आवश्यक है।
इस तरह खबर का असर भी बना रहेगा और बिना पुष्ट प्रमाण के किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाने का जोखिम भी कम होगा।



