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रूसी गुड़िया ‘मत्रयोश्का’ के माध्यम से रूसी संस्कृति से परिचय –

 

✍️आशीष मिश्र

 

वाराणसी:- महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और रूस के ‘कोजमा मिनिन निज़्नी नोवगोरोद स्टेट पेडागोजिकल विश्वविद्यालय’ के संयुक्त प्रयास से 03–15 नवम्बर 2025 तक आयोजित दो सप्ताह के अंतरराष्ट्रीय कोर्स “Russian Character in the Mirror of the Language” में आज छात्रों को रूसी संस्कृति की अनूठी दुनिया से अवगत कराया गया।

कोर्स की संयोजिका एवं रूसी भाषा की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज धनकड़ ने कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कोर्स छात्रों को रूसी भाषा के चारों मूल कौशल—सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना—प्रत्यक्ष रूप से रूसी विशेषज्ञों से सीखने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण न केवल भाषा सीखने को प्रभावी बनाते हैं, बल्कि छात्रों को वैश्विक दृष्टिकोण तथा अंतरसांस्कृतिक समझ से भी समृद्ध करते हैं। डॉ. धनकड़ ने रूसी सरकार की विभिन्न विषयों में उपलब्ध छात्रवृत्ति योजनाओं के बारे में जानकारी दी और छात्रों को इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

आज के मुख्य सत्र में रूसी विश्वविद्यालय की अध्यापिका, प्रसिद्ध भाषाविद् एवं कोर्स की संचालिका डॉ. नजेझदा इगोरवना ने छात्रों को रूस की पारंपरिक और विश्व-प्रसिद्ध गुड़िया ‘मत्रयोश्का’ के माध्यम से रूसी संस्कृति का रोचक परिचय कराया। उन्होंने मत्रयोश्का के इतिहास, कला, निर्माण शैली तथा उसके सांस्कृतिक प्रतीकवाद पर विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान इस पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसे छात्रों ने उत्साहपूर्वक देखा।

मत्रयोश्का गुड़िया: संस्कृति, परंपरा और क्षेत्रीय विविधताओं का प्रतीक

सत्र में बताया गया कि मत्रयोश्का केवल परिवार और मातृत्व का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि रूस की क्षेत्रीय विविधताओं और विभिन्न प्रांतों की पारंपरिक वेशभूषा, कला और लोकसंस्कृति को भी दर्शाती है। अलग-अलग क्षेत्रों की मत्रयोश्काओं में उनकी विशिष्ट शैली, पहनावे, रंग और डिज़ाइन दिखाई देते हैं, जिनसे रूस की सांस्कृतिक विविधता को आसानी से पहचाना जा सकता है।

छात्रों को मत्रयोश्का गुड़िया से जुड़ी कई रोचक जानकारियाँ भी दी गईं—

पहली मत्रयोश्का 1890 में जापानी गुड़िया ‘फुकुरूमा’ से प्रेरित होकर बनाई गई थी।

 ‘मत्रयोश्का’ नाम रूसी शब्द *मात्र्योना* से निकला है, जिसका अर्थ माँ या सम्मानित महिला होता है।

पारंपरिक गुड़ियों में 5 से 7 छोटी गुड़ियाँ होती हैं, जबकि कुछ सेट में 30 से अधिक गुड़ियाँ भी मिलती हैं।

 ये गुड़ियाँ बर्च और लिंडन की लकड़ी से हाथ से तराशी और रंगी जाती हैं।

रूस में इन्हें सौभाग्य, समृद्धि और पारिवारिक एकता का प्रतीक माना जाता है।

गिनीज़ रिकॉर्ड के अनुसार 51 गुड़ियों वाला एक सेट सबसे बड़ा माना जाता है।

छात्रों ने बताया कि इस सत्र ने उन्हें न केवल रूसी भाषा सीखने में मदद की, बल्कि रूस की विरासत, परंपराओं और क्षेत्रीय विविधताओं को जानने का अवसर भी प्रदान किया

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