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सिंचाई विभाग में ‘सेटिंग’ का खेल? 466 लाख के टेंडर पर बड़ा सवाल –

योगी सरकार की छवि पर दाग? सिंचाई विभाग में टेंडर घोटाले के गंभीर आरोप -

 

रिपोर्ट: प्रदीप कुमार उपाध्याय

 

लखनऊ:-  उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने सरकार की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधीक्षण अभियंता भानु प्रताप सिंह (सप्तम मंडल) द्वारा जारी निविदा सूचना संख्या 07/SE-VII/25-26 (LOT-02) के तहत करीब 466.94 लाख रुपये के कार्य में कथित अनियमितताओं की चर्चा तेज हो गई है।

 

यह टेंडर वीआईपी गेस्ट हाउस, फील्ड हॉस्टल और एनेक्सी की विद्युत व्यवस्था के नवीनीकरण से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, 18 मार्च को हुए टेक्निकल इवैल्यूएशन में जिस कंपनी को दस्तावेजों की कमी के चलते अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए था, उसी को कथित रूप से टेंडर दे दिया गया।

 

*अयोग्य कंपनी को ठेका देने का आरोप, नियमों को खुलकर किया गया नजरअंदाज?*

 

मामले में अंदरखाने ‘सेटिंग’ और मिलीभगत के आरोप भी सामने आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि टेंडर खोलने की प्रक्रिया में ही खेल कर दिया गया, जिससे एक खास कंपनी को फायदा मिल सके। यदि यह सही है, तो यह सीधे-सीधे टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।

 

सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर है कि जिस फर्म को यह कार्य दिया गया, वह विभाग में केवल सिविल कार्यों के लिए पंजीकृत बताई जा रही है, जबकि यह पूरा प्रोजेक्ट विद्युत कार्य से जुड़ा है। ऐसे में यह निर्णय कैसे लिया गया, यह जांच का विषय बन गया है।

 

*सिविल फर्म को दे दिया विद्युत कार्य, क्या पहले से तय था पूरा खेल?*

 

अधीक्षण अभियंता की भूमिका को लेकर भी उंगलियां उठ रही हैं। सवाल यह है कि क्या नियमों को दरकिनार कर किसी चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाया गया? या फिर पूरे मामले में उच्च स्तर की अनदेखी हुई?

 

हालांकि, अब तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। लेकिन अगर आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला न केवल विभाग बल्कि सरकार की छवि पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

अब देखने वाली बात होगी कि क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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