लखनऊ :– लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, शुल्क अनियमितताओं एवं निष्कासित छात्रों की बहाली की मांग को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने का आज 49वाँ दिन है। जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे विश्वविद्यालय प्रशासन का दमनकारी और अमानवीय रवैया भी बढ़ता जा रहा है।
पहले धरना स्थल की बिजली और पानी काटा गया। फिर जिस पेड़ के नीचे छात्र धूप और बारिश से बचते थे, उसे कटवा दिया गया। समाज के सहयोग से लगाई गई कैनोपी को भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा गार्डों के माध्यम से फड़वा दिया, जिससे छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई और पुलिस तक बुलानी पड़ी। इतना ही नहीं, गार्डों पर भी दबाव बनाकर दोबारा छात्रों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए भेजा गया।

लगातार बारिश के कारण धरना स्थल पर साँप निकल रहे हैं तथा पेड़ों और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई में डटे हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मानवीय संवेदनाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
छात्रों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी दमन या प्रताड़ना से डरने वाले नहीं हैं। फीस वृद्धि वापस होने, निष्कासित छात्रों की बहाली और छात्रहितों की मांगें पूरी होने तक यह लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा। इसी दौरान आज जब विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली के विरोध में धरना स्थल पर छात्रों का आक्रोश फूटा, तब कई पूर्व छात्र पदाधिकारी भी छात्रों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों का हौसला बढ़ाया। छात्रों के समर्थन में बढ़ते जनसमर्थन और विरोध को देखकर विश्वविद्यालय प्रशासन के कई पदाधिकारी मौके से निकल गए। इस दौरान प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य भी वहां से भाग गए, जिससे प्रशासन की स्थिति असहज दिखाई दी।
“दमन बढ़ेगा तो संघर्ष भी और मजबूत होगा।”
धरने पर बैठे छात्रों ने कहा कि लगातार बारिश, धरना स्थल पर साँप निकलने, पेड़ों के गिरने और बिजली गिरने जैसे गंभीर खतरों के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं कर रहा है। यदि धरना स्थल पर किसी भी छात्र के जान-माल का कोई नुकसान होता है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी एवं प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी की होगी।
ये सभी पूर्व छात्रनेता आज समर्थन में पहुचे –– 



