
✍️आशीष मिश्र
वाराणसी:- महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 106वें स्थापना दिवस के पूर्व दिवस पर अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग द्वारा विभिन्न शैक्षणिक कार्यकम आयोजित किये गये। कार्यकम का प्रथम सत्र व्याख्यान सत्र रहा जिसमें बीज वक्तव्य प्रस्तुत्ति के लिये मुख्य वक्ता एवं अतिथि प्रो० अमिता सिंह (पूर्व चीफ प्रॉक्टर एवं विभागाध्यक्ष-समाजशास्त्र विभाग) आमंत्रित थी। कार्यक्रम का शुभारंग दीप प्रज्जवलन एवं महात्मा गांधी के तैलचित्र पर पुष्पार्णपण से हुआ।

विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ० नीरज घनकड़ ने मुख्य वक्ता एवं अतिथि प्रोफेसर अमिता सिंह का अंगवस्त्रम एवं सुन्दर पौधा देकर उनकी सादर उपस्थिति का स्वागत किया। प्रो० अमिता सिंह ने अपने अभिभाषण में विश्वविद्यालय के तीन संस्थापकों राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भारतरत्न श्री शिवप्रसाद गुप्त एवं राष्ट्ररत्न डॉ० भगवानदास के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं समर्पण पर प्रकाश डाला। प्रो० सिंह ने श्री शिवप्रसाद गुप्त की दानशीलता का उदाहरण देते हुये विद्या दान को सर्वश्रेष्ठ दान बताया। प्रथम व्याख्यान सत्र में मुख्य रूप से मानवीकी संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो० राजेश मिश्रा, प्रो० नलिनी श्याम कामिल प्रो० बी०डी० पाण्डेय, प्रो० संजय, डॉ० राहुल गुप्ता, डॉ अनूकूल चन्द राय, डॉ नीरज कुमार सोनकर एवं श्री प्रियोदीप हलघर आदि गणमान्य प्रोफेसरों की उपस्थिति रही। कार्यकन के प्रथम व्याख्यान सत्र का संचालन डॉ० धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यकम की संयोजिका डॉ० रीना चटर्जी ने किया। स्वागत अभिभाषण में विभागाध्यक्ष डॉ० नीरज धनकड ने सभी अतिथियों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।
कार्यकम का द्वितीय सत्र बापू कक्ष में प्रतियोगिता के रुप में आयोजित हुआ जिसमें पंजीकृत छात्र-छात्राओं ने श्रीमद भगवदगीता के श्लोकों का वाचन किया एवं प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना स्थान छात्र-छात्राओं द्वारा प्राप्त किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक के रुप में प्रो० नलिनी श्याम कानिल एवं डॉ० धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने अपनी अहम भूमिका निभाते हुये प्रतियोगिता को संपादित कराया। डॉ रीना चटर्जी ने दोनो निर्णायक अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस सत्र का संचालन डॉ० आकांक्षा सिंहम न किया। विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ० नीरज धनकड़ ने सभी प्रतिभगियों की पंशसा करते हुए कहा कि गीता का अध्ययन कर्म मार्ग को प्रशस्त करता है एवं प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा एवं कर्म की शिक्षा गीता से ही प्राप्त होती है।
उक्त दिवस का समापन एवं अंतिम सत्र संस्थापकों पर आधारित क्वीज-प्रतियोगिता के रुप में आयोजित हुआ जिसमें प्रो० नीरज धनकड की अध्यक्षता में दो निर्णायक डॉ० नवरत्न सिंह, डॉ० नीरज कुमार सोनकर एवं डॉ० रीना चटर्जी ने क्वीज-प्रतियोगिता को सकुशल सम्पन्न कराया। लैंग्वेंज लैब के डिस्प्ले बोर्ड पर प्रश्नों को प्रदर्शित कर छात्र-छात्राओं की बनी तीन टुकड़ियों ने प्रश्नों का जबाब दिया एवं अपना अव्वल स्थान प्राप्त करनें में अपनी प्रतिस्पर्धा दिखाई। इस सत्र में संचालन का कार्य डॉ० आकांक्षा सिंहम, देवम पाण्डेय ने संयुक्त रुप से किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ० रीना चटर्जी ने किया।



