वाराणसी

फॉलोअर यातायात पुलिस की वर्दी पहनकर रौब गांठने और अवैध वसूली के आरोप

वाराणसी में फॉलोअर पर यातायात पुलिस की वर्दी पहनकर रौब गांठने और अवैध वसूली के आरोप, विभागीय कार्रवाई पर सवाल

 

पहले भी सामने आ चुका है फॉलोअर से जुड़ा मामला, अब धर्मेंद्र मिश्रा पर लगे गंभीर आरोप; ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की भी चर्चा

 

वाराणसी। जिले में पुलिस विभाग से जुड़े फॉलोअर्स द्वारा कथित तौर पर वर्दी का दुरुपयोग कर आम जनता पर दबदबा बनाने और अवैध वसूली करने के आरोप सामने आ रहे हैं। ताजा मामला थाना पांडेपुर क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां कार्यरत फॉलोअर धर्मेंद्र मिश्रा पर यातायात पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों पर रौब जमाने और अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

 

जानकारी के अनुसार, बीते दिनों रमेश चौबे नामक फॉलोअर से जुड़ा एक मामला सोशल मीडिया पर सामने आया था। बताया जाता है कि मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद संबंधित कर्मचारी को सख्त हिदायत दी गई थी। अब इसी तरह के आरोप धर्मेंद्र मिश्रा के खिलाफ सामने आने से विभागीय निगरानी और अनुशासन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

 

वर्दी और अधिकारियों के नाम पर दबदबा बनाने का आरोप

 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र मिश्रा पर यातायात पुलिस की वर्दी पहनकर आम लोगों के बीच स्वयं को प्रभावशाली पुलिसकर्मी के रूप में प्रस्तुत करने का आरोप है। इतना ही नहीं, अधिकारियों के नाम और वर्दी के प्रभाव का इस्तेमाल कर कथित अवैध वसूली करने की बात भी सामने आई है।

 

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि कुछ लोग पुलिस के भय से खुलकर शिकायत करने से कतरा रहे हैं। ऐसे में आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।

 

कार्रवाई की चर्चा के बीच ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का दावा

 

सूत्रों का दावा है कि संबंधित फॉलोअर की गतिविधियों की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद विभागीय कार्रवाई की बात सामने आई। इसके बाद धर्मेंद्र मिश्रा के बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित होने की जानकारी मिली। यह भी आरोप है कि वह अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी करने लगा।

 

जानकारी के मुताबिक, ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने को लेकर विभागीय रपट दर्ज किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि और कार्रवाई का विवरण अभी सामने नहीं आया है।

 

बताया जाता है कि रमेश चौबे और धर्मेंद्र मिश्रा, दोनों को मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत नियुक्ति मिली थी। इस संबंध में भी विभागीय अभिलेखों से पुष्टि आवश्यक है।

 

सक्षम अधिकारी से संपर्क, स्पष्ट जवाब नहीं

 

इस पूरे प्रकरण को लेकर यातायात विभाग के एक सक्षम अधिकारी से बातचीत की गई। हालांकि, आरोपों और संभावित विभागीय कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। अधिकारी ने विभागीय प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कार्रवाई का इंतजार करने की बात कही।

 

बड़ा सवाल—वर्दी के कथित दुरुपयोग पर कब होगी निष्पक्ष जांच?

 

इस प्रकरण ने पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कोई कर्मचारी अपने अधिकृत पद और जिम्मेदारियों से हटकर पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल करता है तथा उसके माध्यम से अवैध वसूली करता है, तो यह गंभीर जांच का विषय है।

 

अब सवाल यह है कि क्या वाराणसी पुलिस प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या संबंधित कर्मचारी की ड्यूटी, वर्दी पहनने की अनुमति और कथित वसूली से जुड़े आरोपों की पड़ताल होगी?

 

 

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