
रामनगर रामलीला के २८ वें ( राम भरत मिलाप) दिन का प्रसंग –

कारण कवन नाथ नहीं आयऊ। जानि कुटिल किधौ मोहि बिसराऊ।
परे भूमि नहीं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधू उर लाए।।

आज की कथा में सभी अयोध्यावासी राम विरह से बहुत व्याकुल थे । भरत जी अत्यंत अधीर हो रहे थे।तभी नंदीग्राम पर हनुमान जी साधु का वेष धारण करके भरत जी को राम जी के आने का संदेश सुनाते है ।भरत जी उनसे उनका परिचय पूछते है तब राम सेवक उनको अपना नाम हनुमान बताते है और अपने अत्यंत सुंदर वानर रूप में आते है। भरत जी भावविभोर होकर उनको आलिंगन करते है और पूछते है राम जी क्या हमको याद करते है? हनुमान जी बोलते है, उनके मुख में आपका ही नाम रहता है तत्पश्चात हनुमान जी राम जी के पास जाते है भरत जी अयोध्या आकर माताओं और गुरु जी को राम जी के आने की खबर देते हैं। ये सब सुनकर सभी बहुत प्रसन्न हो जाते है सभी अयोध्या को सजाने लगते है।रथ,हाथी,घोड़े सजाए जाते है।सभी राम जी से मिलने के लिए अयोध्या की सीमा पर राम जी के पास ही चले जाते है ।राम जी अयोध्या का बखान सभी वानरी वीर लोगो से करते है ।भरत जी राम जी को देखते ही दौड़ कर राम जी के पास जाते है और भावविभोर होकर आलिंगन करते है। सभी भाई आपस में प्रेम से आलिंगन करते है। पुरवासी जन भी राम जी से मिलते है। आगे बढ़ने पर नगर के बाहर ही माताओं से भगवन मिलते है। विभीषण,हनुमान सुग्रीव,जामवंत नलनील अंगद सभी अयोध्या आते ही मनुष्य वेष में आ जाते है। सभी माता कौशल्या को प्रणाम करते है। माता सीता सभी माताओं से मिलती हैं तत्पश्चात सभी राजमहल में आते है ।राम जी गुरु के सामने सभी वीर लोगो की प्रशंसा करते है। अयोध्यावासी,मुनि ,संत और गुरुजन राम जी को राजतिलक करने की बात कहते है और क्यों न करे! सभी की यही तो इच्छा थी जो आज भगवन स्वयं पूरा करने अयोध्या आ गए है। यही कथा का विश्राम हो जाता है। आज की आरती माता कौशल्या जी के द्वारा होता है।
जय सिया राम – हर हर महादेव



