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भुवनेश्वर में UPMRC ने बढ़ाया उत्तर प्रदेश का मान, 19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन में मिला बेस्ट स्टॉल अवार्ड –

 

 

लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो की मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी बनी आकर्षण का केंद्र, राष्ट्रीय मंच पर UPMRC की उपलब्धियों को मिली सराहना

UPMRC के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने डेटा गवर्नेंस और स्मार्ट परिवहन पर दिया मुख्य वक्तव्य, विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य में आधुनिक परिवहन की भूमिका पर डाला प्रकाश

लखनऊ/भुवनेश्वर। उत्तर प्रदेश में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहे उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और उपलब्धि हासिल की है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक आयोजित 19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया (UMI) सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में UPMRC के पवेलियन को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि को बेस्ट स्टॉल अवार्ड के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है।

यह सम्मान शहरी परिवहन के क्षेत्र में UPMRC की उपलब्धियों, नवाचारों, यात्री सुविधाओं और परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के प्रयासों की प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए प्रदान किया गया।

मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन वॉल बनी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण –

सम्मेलन में लगाए गए UPMRC के पवेलियन में लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो की उपलब्धियों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। पवेलियन का सबसे प्रमुख आकर्षण ‘मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन वॉल’ रही, जिसके माध्यम से मेट्रो सेवाओं को रेलवे स्टेशनों और परिवहन के अन्य साधनों से जोड़ने की व्यवस्था को दर्शाया गया।

इस प्रस्तुति के जरिए यह समझाने का प्रयास किया गया कि मेट्रो, रेलवे और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने से यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में अधिक सुविधा मिलती है। इससे यात्रा का समय बचाने, निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और सार्वजनिक परिवहन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है।

प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो सेवाओं के विस्तार, यात्रियों की सुविधाओं तथा भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी गई।

                                                                               

यात्री सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण की पहलों को मिली सराहना –

UPMRC के पवेलियन में मेट्रो परियोजनाओं की उपलब्धियों के साथ यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही आधुनिक सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण से संबंधित पहलों और भविष्य की विस्तार योजनाओं को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

शहरी परिवहन व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक, सुलभ और टिकाऊ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने प्रदर्शनी में UPMRC की उपस्थिति को विशेष पहचान दिलाई।

राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक श्रेणी का द्वितीय पुरस्कार प्राप्त होना इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश मेट्रो की परियोजनाओं और सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को व्यापक मंच पर सराहना मिल रही है।

डेटा गवर्नेंस और स्मार्ट परिवहन पर बोले प्रबंध निदेशक सुशील कुमार –

सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने ‘डेटा गवर्नेंस और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र में मुख्य वक्तव्य दिया।

उन्होंने कहा कि भविष्य की शहरी परिवहन व्यवस्था को अधिक कुशल, सुरक्षित और यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने में डेटा आधारित निर्णयों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और स्मार्ट परिवहन नियोजन के माध्यम से शहरों में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।

डेटा आधारित परिवहन प्रणाली से यातायात जाम की समस्या कम करने, कार्बन उत्सर्जन नियंत्रित करने और परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायता मिल सकती है।

डेटा सुरक्षा और यात्रियों की निजता को बताया महत्वपूर्ण –

अपने संबोधन में प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने स्मार्ट परिवहन व्यवस्था के विकास के साथ डेटा सुरक्षा और यात्रियों की निजता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि परिवहन से जुड़ी विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए साझा तकनीकी मानकों और डेटा के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता है।

उन्होंने डेटा साझा करने की पारदर्शी व्यवस्था, यात्रियों की निजी जानकारी की सुरक्षा और तकनीकी प्रणालियों के बीच आपसी समन्वय को भविष्य की परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उनके संबोधन में इस बात पर विशेष जोर रहा कि आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना होना चाहिए।

शहरी परिवहन की चुनौतियों और समाधान पर हुआ मंथन –

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन देश में शहरी परिवहन व्यवस्था के विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच है।

इस आयोजन में नीति निर्माता, परिवहन विशेषज्ञ, मेट्रो रेल संगठनों के प्रतिनिधि और शहरी विकास से जुड़े विभिन्न संस्थानों के अधिकारी भाग लेते हैं।

सम्मेलन के माध्यम से बढ़ते शहरीकरण, यातायात जाम, पर्यावरण प्रदूषण, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता और आधुनिक तकनीक के उपयोग जैसी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाता है।

इसके साथ ही देश के विभिन्न शहरों में अपनाई जा रही सफल परिवहन व्यवस्थाओं, नई तकनीकों और बेहतर कार्यप्रणालियों के अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया जाता है।

लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो की उपलब्धियों को राष्ट्रीय पहचान –

भुवनेश्वर में आयोजित इस सम्मेलन में UPMRC को मिला सम्मान उत्तर प्रदेश के शहरी परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो परियोजनाओं के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने और विभिन्न परिवहन सेवाओं के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को इस मंच पर प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

मेट्रो सेवाओं को परिवहन के अन्य साधनों से जोड़ने की अवधारणा आने वाले समय में यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक यात्रा व्यवस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती –

UPMRC की यह उपलब्धि केवल एक प्रदर्शनी में पुरस्कार प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश में एकीकृत, सुरक्षित, कुशल और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी है।

भविष्य में मेट्रो नेटवर्क और परिवहन के अन्य साधनों के बीच बेहतर समन्वय से शहरी यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

UPMRC ने आधुनिक तकनीक, यात्री सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देते हुए विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य में योगदान देने की अपनी प्रतिबद्धता को इस राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया।

 

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