
लखनऊ:- ऐक्टू और आइसा नेताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग को लेकर ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) के प्रदेशव्यापी आह्वान पर कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय मांग पत्र जिला प्रशासन को सौंपा।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत अपराह्न ऐक्टू के जिला मंत्री कुमार मधुसूदन मगन और उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष कमला गौतम के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने ऐक्टू और आइसा नेताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने तथा आशा कर्मियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष कमला गौतम, ऐक्टू के जिला सचिव कुमार मधुसूदन मगन और ऐपवा की जिला संयोजिका सरोजिनी बिष्ट ने आरोप लगाया कि 23 अक्टूबर को लखनऊ के ईको गार्डन में आशा कर्मियों के महाजुटान के दौरान शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन समाप्त होने के बाद एक अन्य सरकारी यूनियन से जुड़े घटनाक्रम में ऐक्टू और आइसा नेताओं को जोड़कर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। उन्होंने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए मुकदमा वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन में आशा कर्मियों और संगिनियों के वर्षों से बकाया प्रोत्साहन राशि का दीपावली से पहले भुगतान करने, स्वास्थ्य मंत्री एवं मिशन निदेशक के साथ वार्ता में बनी सहमतियों को लागू करने तथा प्रदेश के प्रत्येक गांव में आशा, संगिनी और एएनएम के कार्य निष्पादन के लिए एक क्वार्टर की व्यवस्था करने की मांग भी शामिल रही।
प्रदर्शन में इनौस के राज्य सहसचिव राजीव गुप्ता, निर्माण मजदूर यूनियन की अध्यक्ष मंजू गौतम, ऐपवा नेत्री सुमन सेंगर, सरिता, सुदामा, लज्जावती, प्रेमा, तुलसी सोनकर, तारावती, अंजली, मंसूरा, राम अनुज ओझा और रामदेवी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।



