एमपी- यूपी बॉर्डर पर तहबाजारी का खेल! कालिंजर बॉर्डर पर खनिज लदे ट्रकों से वसूली पर सवाल, वैध ठेके के दावे के बीच पारदर्शिता की मांग –
मध्य प्रदेश से आने वाले वाहनों को रोककर रॉयल्टी-पर्ची के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेने के आरोप; जिला पंचायत से ठेके का आदेश, कार्यक्षेत्र और निर्धारित दरें सार्वजनिक करने की मांग -

बांदा :- उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर खनिज लदे मालवाहक वाहनों से तहबाजारी के नाम पर की जा रही शुल्क वसूली का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। महोबा जिले की कबरई खनिज मंडी से लेकर बांदा जनपद के सीमावर्ती मार्गों और विशेष रूप से कालिंजर बॉर्डर पर संचालित वसूली व्यवस्था को लेकर वाहन स्वामियों, ट्रक चालकों और स्थानीय लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आरोप है कि मध्य प्रदेश से गिट्टी, बालू और अन्य खनिज लेकर उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने वाले वाहनों को रोककर रॉयल्टी और पर्ची के नाम पर अतिरिक्त धनराशि मांगी जा रही है।
वाहन चालकों का कहना है कि वैध रॉयल्टी और परिवहन संबंधी दस्तावेज होने के बावजूद उनसे सीमा पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। कुछ चालकों ने जबरन वसूली, विरोध करने पर बदसलूकी और वाहनों को घंटों रोके रखने जैसी शिकायतें भी की हैं। आरोप यह भी हैं कि सीमावर्ती मार्गों पर निजी कर्मचारियों को तैनात कर वाहनों से रकम वसूली जा रही है। इससे ट्रांसपोर्टरों पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ अंतरराज्यीय खनिज परिवहन भी प्रभावित हो रहा है।
हालांकि, मौके पर की गई पड़ताल के दौरान स्थानीय स्तर पर संबंधित लोगों की ओर से इस वसूली को जिला पंचायत द्वारा जारी अधिकृत ठेके के तहत वैध बताया जा रहा है। यही वजह है कि मामला अब केवल अवैध वसूली के आरोपों तक सीमित न रहकर ठेके की वैधानिकता, निर्धारित कार्यक्षेत्र और वसूली के अधिकार की पारदर्शिता से भी जुड़ गया है।
कालिंजर बॉर्डर पर वसूली का अधिकार किस आदेश से?
स्थानीय लोगों और ट्रांसपोर्टरों का सवाल है कि यदि जिला पंचायत का ठेका वैध है तो उसका शासनादेश, टेंडर की शर्तें, ठेके की अवधि, अधिकृत वसूली केंद्र और निर्धारित शुल्क की दरें सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही हैं? उनका कहना है कि तहबाजारी वसूली के लिए स्वीकृत स्थल और कार्यक्षेत्र स्पष्ट होना चाहिए। यदि कालिंजर बॉर्डर पर वसूली की अनुमति है तो संबंधित आदेश में इसका स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए, ताकि किसी भी वाहन चालक को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
सामान्य तौर पर खनिज परिवहन से जुड़े शुल्क और तहबाजारी की वसूली निर्धारित नियमों एवं अधिकृत स्थलों के अनुसार ही की जा सकती है। ऐसे में कालिंजर थाना क्षेत्र में वर्तमान वसूली केंद्र की स्वीकृति और उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब जिला पंचायत प्रशासन को देना चाहिए। खासकर तब, जब वाहन चालक वैध रॉयल्टी दस्तावेज होने के बावजूद अतिरिक्त शुल्क लिए जाने की शिकायत कर रहे हैं।
बड़े सूचना बोर्ड और अधिकृत रसीद व्यवस्था की मांग
स्थानीय नागरिकों और ट्रांसपोर्टरों ने मांग की है कि जिला पंचायत प्रशासन इस पूरे मामले में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करे। वसूली स्थल पर बड़े सूचना बोर्ड लगाए जाएं, जिन पर ठेके का आदेश, अधिकृत चेक प्वाइंट, ठेके की अवधि और निर्धारित सरकारी दरों का स्पष्ट विवरण दर्ज हो। साथ ही वसूली में लगे कर्मचारियों के पहचान पत्र और अधिकृत रसीद बुक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
यदि ठेका पूरी तरह वैध और नियमों के अनुरूप है तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। वहीं, यदि जांच में निर्धारित नियमों से हटकर वसूली या अधिकार क्षेत्र के बाहर शुल्क लेने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब प्रशासन की जवाबदेही तय करने का समय
सीमावर्ती मार्गों पर दिनदहाड़े वाहनों को रोककर शुल्क वसूली की शिकायतों ने प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांसपोर्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन और वाहनों का परिचालन बंद करने पर विचार कर सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कालिंजर बॉर्डर पर तहबाजारी वसूली किस शासनादेश और किस अधिकार के तहत की जा रही है? जिला पंचायत प्रशासन को ठेके की वैधता, निर्धारित दरों और अधिकृत कार्यक्षेत्र का पूरा विवरण सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि वैध राजस्व वसूली और कथित अवैध वसूली के बीच अंतर साफ हो सके।



