
“पुलिस मंथन” वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन-2025 –

लखनऊ:- पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन- 2025 ‘पुलिस मंथन’ का शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुआ। मुख्यमंत्री योगी द्वारा अपने सम्बोधन में यूपी पुलिस के अब तक के कार्य, सुधार और उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले साढ़े आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपने परसेप्शन और कानून-व्यवस्था की छवि में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को आज देश-दुनिया में एक रोल मॉडल की तरह देखा जा रहा है और परिवर्तन की यह पहचान जनता के अनुभवों से सिद्ध होती है, न कि आत्मप्रशंसा से। इस दौरान उन्होंने स्मार्ट पुलिसिंग का विजन साझा करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक पुलिसिंग के हर स्तर पर व्यापक बदलाव हुए, भर्ती, प्रशिक्षण, अवसंरचना, तकनीक, साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक क्षमता, पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था, UP-112, सेफ सिटी मॉडल, महिला पुलिस भर्ती, और प्रीडिक्टिव पुलिसिंग की दिशा में निर्णायक प्रगति की गई है। पहले जहां प्रशिक्षण क्षमता सीमित थी, वहीं आज बड़े पैमाने पर 60,000 से अधिक आरक्षियों का प्रशिक्षण प्रदेश के अन्दर ही कराया जा रहा है। 75 जनपदों में साइबर थाने, 12 एफएसएल लैब और फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी जैसे संस्थागत बदलाव प्रदेश की नई सोच को दर्शाते हैं।
पुलिस मंथन के दौरान आयोजित विभिन्न सत्र के समापन के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश –
सत्र-01: बीट पुलिसिंग के समापन पर मा० मुख्यमंत्री जी का उद्बोधन
ग्राम स्तरीय सुरक्षा तंत्र का सुदृढ़ीकरण –
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात चौकीदारों को पुलिस बीट व्यवस्था से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती मिले। उन्होंने कहा कि ग्राम चौकीदार गांव की सामाजिक संरचना से भली-भांति परिचित होते हैं और उनकी सक्रिय भागीदारी से अपराध की रोकथाम, समय पर सूचना संकलन एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
जनविश्वास एवं कानून-व्यवस्था में सशक्त वृद्धि –
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीट पुलिस के प्रमुख आरक्षी व दारोगा ग्राम स्तर पर निरंतर संवाद, प्रभावी जनसंपर्क और आपसी विश्वास का वातावरण निर्मित करें। इससे आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी तथा कानून-व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में यह व्यवस्था एक प्रभावी और भरोसेमंद मॉडल के रूप में स्थापित होगी।
सत्र – 2: महिला/बाल सुरक्षा एवं मानव तस्करी के समापन पर मुख्यमंत्री का उद्बोधन
मिशन शक्ति: समन्वित प्रयासों से सफलता –
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मिशन शक्ति की सफलता केवल पुलिस के प्रयासों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय, साझा जिम्मेदारी और सतत संवाद का परिणाम है। महिला सुरक्षा को प्रभावी बनाने हेतु सभी विभागों को एकजुट होकर योजनाबद्ध ढंग से कार्य करना होगा।
आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा पर विशेष बल –
मुख्यमंत्री ने कहा कि,महिलाओं की सुरक्षा दो स्तरों पर सुनिश्चित करना अनिवार्य है—आंतरिक सुरक्षा और बाह्य सुरक्षा। परिवार एवं समाज में ऐसा सुरक्षित वातावरण बने, जहाँ महिलाएं निर्भीक होकर अपनी पीड़ा साझा कर सकें। वहीं, सार्वजनिक स्थलों, बाजारों एवं कार्यस्थलों पर एंटी रोमियो स्क्वॉड एवं महिला बीट द्वारा सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
संवाद, जागरूकता एवं त्वरित सहायता व्यवस्था –
मुख्यमंत्री ने महिला बीट पुलिस को निर्देशित किया कि वे स्थानीय स्तर पर नियमित रूप से महिलाओं के साथ संवादात्मक बैठकें करें। साथ ही, टोल-फ्री सहायता नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर महिलाओं को त्वरित सहायता एवं भरोसे का वातावरण प्रदान किया जाए।
महिला पुलिस बल की सशक्त भूमिका –
मुख्यमंत्री ने महिला पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ फील्ड में कार्य करने हेतु सक्षम बनाया जाए। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि आज उत्तर प्रदेश में महिलाएं स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रही हैं, जो कि उत्तर प्रदेश पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सत्र – 3: थाना प्रबंधन एवं उन्नयन के समापन पर मुख्यमंत्री का उद्बोधन –
पुलिसिंग सिस्टम की रीढ़ थाना प्रबंधन है, इसलिए थाना प्रभारियों की तैनाती सिर्फ मेरिट के आधार पर की जानी चाहिए। राजनीतिक हस्तक्षेप न्यूनतम रखा जाए और जहां अनावश्यक दबाव आता है उसे सिरे से खारिज किया जाए। सुरक्षा व्यवस्था आवश्यकता अनुसार दी जाए, न कि स्टेटस सिंबल के रूप में।
संरचना सुधार के तहत लगभग 50,000 पुलिसकर्मियों को थानों में तैनात करने, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मॉडल के आधुनिक थाने, पार्किंग, बैरक, पब्लिक-सर्विस स्पेस जैसी सुविधाओं के साथ विकसित करने की आवश्यकता है। थानों के निर्माण, पुलिस कमिश्नरेट मॉडल और फायर स्टेशनों के लिए स्पष्ट नीति और त्वरित निर्णय जरूरी है ताकि उपलब्ध बजट का प्रभावी उपयोग हो सके।
पुलिस व्यवहार (Police Behaviour) सुधार एक केंद्रीय मुद्दा है। महाकुंभ, प्रवासी भारतीय दिवस जैसे बड़े आयोजनों में पुलिस के उत्कृष्ट व्यवहार को सराहा गया, जबकि नियमित व्यवस्था में शिकायतें बनी हुई हैं। इसलिए नियमित काउंसलिंग, बीट प्रणाली की प्रभावी मॉनिटरिंग, और इसे ACR से जोड़कर जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।
दैनिक अपराध—जैसे चेन स्नेचिंग, लूट, महिलाओं के खिलाफ अपराध—जनता में असुरक्षा और नकारात्मक धारणा पैदा करते हैं, अतः पुलिस की कार्यशैली, त्वरित प्रतिक्रिया और व्यवहार दोनों स्तरों पर सुधार से ही परसेप्शन बदलेगा। अनुभवी विशेषज्ञों की सलाह और विभागीय समन्वय से यूपी में एक आधुनिक, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित पुलिस मॉडल स्थापित किया जा सकता है।
सत्र – 4: साइबर अपराध के समापन पर मुख्यमंत्री का उद्बोधन –
उत्तर प्रदेश में कोविड कालखंड के दौरान हर ग्राम पंचायत में नियुक्त बीसी सखी और बैंकों के बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट्स के साथ समन्वय बनाकर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में डिजिटल लेन-देन सुरक्षा पर व्यापक अवेयरनेस अभियान चलाया जा सकता है। डिजिटल ट्रांजैक्शन से सुविधा बढ़ी है, पर लालच, फर्जी कॉल, ओटीपी और अकाउंट डिटेल मांगने जैसी ठगी की घटनाओं ने जोखिम भी बढ़ा दिया है। इसे रोकने के लिए बीट प्रणाली, महिला बीट पुलिसिंग और बीसी सखी नेटवर्क एक मजबूत माध्यम बन सकते हैं।राज्य में साइबर अपराधों से निपटने के लिए 02 से बढ़कर 75 थानों तक साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं, मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं और हेल्पलाइन 1930 का विस्तार किया जा रहा है, पर अभी इनकी कार्यक्षमता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। आने वाले समय में तेजी से बढ़ती तकनीक के साथ क्विक रिस्पांस, प्रभावी कार्रवाई और जनजागरूकता दोनों समानांतर रूप से बढ़ाना होगा। साइबर मुख्यालय की स्थापना और समन्वित तैयारी समय की मांग है ताकि नागरिकों को त्वरित राहत और सुरक्षा मिल सके।
सत्र – 5: मानव संसाधन विकास, कल्याण, पुलिस व्यवहार एवं प्रशिक्षण के समापन पर मुख्यमंत्री का समापन उद्बोधन –
*पुलिस प्रशिक्षण क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार*
मा० मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 तक प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता सीमित थी, जिसे बीते पौने नौ वर्षों में बढ़ाकर लगभग 60,000 किया गया है। यह दस गुना से अधिक वृद्धि सुदृढ़ बुनियादी ढांचे, आधुनिक संसाधनों और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। बेहतर प्रशिक्षण से पुलिस बल अधिक दक्ष, अनुशासित और जनसंवेदनशील बन रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिली है।
पुलिस लाइन का बहुआयामी विकास –
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस लाइन को केवल प्रशासनिक इकाई तक सीमित न रखते हुए उसे जन-जागरूकता एवं सामाजिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। पुलिस म्यूजियम, ट्रैफिक पार्क/स्तंभ की स्थापना कर स्कूली बच्चों को पुलिस कार्यप्रणाली एवं यातायात नियमों से अवगत कराया जाए। साइबर नियंत्रण कक्ष की तर्ज पर प्रत्येक जनपद में ऐसी सुविधाओं का चरणबद्ध विकास किया जाए।
गुणवत्ता आधारित पदोन्नति एवं संतुलित संरचना –
मुख्यमंत्री ने कहा कि, पुलिस विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया में गुणवत्ता एवं कार्यक्षमता को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने बताया कि अब तक 1.55 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों को पदोन्नति दी जा चुकी है। साथ ही, प्रत्येक जनपद में संतुलित एवं सुव्यवस्थित ढांचे के निर्माण पर बल दिया गया, जिससे मानव संसाधन का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
पुलिस परिवार कल्याण एवं ज्ञान-संवर्धन –
मुख्यमंत्री ने वामा सारथी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस परिवार कल्याण के लिये लगातार काम किए जा रहे हैं। इसे वामा सारथी को और तेज करना होगा। इसके अलावा उन्हें वामा सारथी को विभिन्न उत्पादों के निर्माण को आगे आने के लिये प्रेरित किया। सीएम ने कहा कि पुलिस विभाग द्वारा होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में भी वामा सारथी को अपनी भागीदारी बढ़ानी चाहिए। पुलिस लाइनों में पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए कोचिंग एवं शैक्षिक सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नव-नियुक्त अधिकारी सप्ताह में कम से कम एक घंटे वर्चुअल या भौतिक रूप से मार्गदर्शन प्रदान करें। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को दिशा मिलेगी तथा पुलिस परिवारों के लिए एक सकारात्मक, प्रेरणादायी और उज्ज्वल भविष्य का वातावरण निर्मित होगा।
सत्र – 06: अभियोजन एवं कारागार के समापन पर मुख्यमंत्री का समापन उद्बोधन –
प्रभावी अभियोजन एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन पर जोर*
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था की मजबूती के लिए पुलिस एवं अभियोजन का व्यावहारिक पक्ष प्रभावी ढंग से लागू होना आवश्यक है। इसके लिए प्रशिक्षित, दक्ष एवं संवेदनशील मानव संसाधन की तैनाती सुनिश्चित की जाए, जिससे न्यायिक प्रक्रियाएं समयबद्ध, सुदृढ़ एवं परिणामोन्मुखी बन सकें।
आकांक्षी जनपदों का समग्र विकास एवं सतत समीक्षा –
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आकांक्षी जनपदों को स्पष्ट पैरामीटर के आधार पर सामान्य जनपदों की श्रेणी में लाने हेतु सभी विभाग समन्वित प्रयास करें। नीति आयोग के सहयोग से इन जिलों में विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए तथा प्रत्येक माह बैठक कर निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति का आकलन सुनिश्चित किया जाए।
कारागार सुधार एवं मानवीय दृष्टिकोण से निर्णय –
मुख्यमंत्री ने कहा कि कारागार में निरुद्ध बुजुर्गों, महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों तथा जिनकी सजा अवधि पूर्ण हो चुकी है, उनके मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र रिहाई की प्रक्रिया को गति दी जाए। उन्होंने दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में अत्यंत संवेदनशीलता एवं गहन जांच के साथ कार्रवाई करने पर बल दिया, जिससे निर्दोष परिवारों को अनावश्यक पीड़ा न झेलनी पड़े।
माफिया एवं संगठित अपराध पर सख्त नियंत्रण –
मुख्यमंत्री ने कारागार में निरुद्ध कुख्यात माफिया एवं संगठित अपराधियों पर कड़ी निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि उनकी न्यायालय में उपस्थिति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधियों को किसी भी प्रकार का अवसर न मिले, इसके लिए प्रशिक्षित एवं सक्षम कार्मिकों की तैनाती अनिवार्य है।
कारागार सुधार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में अभिनव पहल –
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि कारागार में बंद बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को संगठित रूप से बाजार से जोड़ा जाए और उनके प्रभावी विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इससे बंदियों को कारागार से मुक्त होने के उपरांत सम्मानजनक एवं स्थायी आजीविका का अवसर प्राप्त होगा, वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे तथा समाज की मुख्यधारा में सकारात्मक भूमिका निभा सकेंगे। मुख्यमंत्री जी ने संबंधित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए इस मॉडल को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया, ताकि सुधारात्मक न्याय की भावना को व्यावहारिक रूप में साकार किया जा सके।
सत्र – 07: सीसीटीएनएस 2.0, न्याय संहिता एवं फॉरेंसिक के समापन पर मुख्यमंत्र@ का समापन उद्बोधन –
भारतीय न्याय संहिता व फॉरेंसिक के प्रभावी प्रयोग से सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों में दुर्दांत माफिया एवं संगठित अपराधियों को प्रभावी दंड नहीं मिल पा रहा था, किंतु आज भारतीय न्याय संहिता एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों के सुदृढ़ और वैज्ञानिक उपयोग से ऐसे अपराधियों के विरुद्ध निर्णायक कार्यवाही संभव हो सकी है। फॉरेंसिक आधारित जांच से गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि की दर में वृद्धि हुई है और अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाया गया है।
फॉरेंसिक अवसंरचना एवं मानव संसाधन का सुदृढ़ीकरण –
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस इंस्टिट्यूट की स्थापना को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे इस क्षेत्र में दक्ष मानव संसाधन विकसित होगा। उन्होंने प्रत्येक जनपद में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, लैब तकनीशियनों के लिए मानक आधारित चयन प्रक्रिया लागू करने तथा साक्ष्य संकलन एवं परीक्षण में निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।
प्रशिक्षण, विस्तार एवं भविष्य की तैयारी –
मुख्यमंत्री ने कहा कि फॉरेंसिक क्षेत्र में क्षमता-वृद्धि के लिए नव-नियुक्त पुलिस कार्मिकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है। वाराणसी में प्रस्तावित 50 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे फॉरेंसिक सेंटर को फॉरेंसिक संस्थान से जोड़कर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने फॉरेंसिक के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इन प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज यूपी पुलिस अपराधियों के लिए भय और आम नागरिकों के लिए विश्वास व सम्मान का भाव स्थापित कर रही है। पुलिस की भूमिका अब केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव और प्रीडिक्टिव पुलिसिंग की ओर बढ़ चुकी है। उनके द्वारा बेस्ट प्रैक्टिसेस साझा करने, नवाचार अपनाने और समयबद्ध व बिंदुवार कार्य प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अंत में मुख्यमंत्री योगी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह दो दिवसीय पुलिस मंथन कार्यक्रम नीति, रणनीति और बेहतर क्रियान्वयन के जरिए समग्र पुलिसिंग को नई दिशा देगा और यूपी पुलिस अपने कार्यों को उसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाती रहेगी।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मेलन में दो दिन उपस्थित रहकर मार्गदर्शन देने हेतु हृदय से आभार व्यक्त किया । उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के गरिमामयी इतिहास में यह एक विशिष्ट क्षण है, जब माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर इस मंथन में सहभागिता की है। उनकी उपस्थिति यह भरोसा देती है कि राज्य नेतृत्व पुलिसिंग की चुनौतियों को समझता है, सुधार की प्रक्रिया में मार्गदर्शक है और परिणामों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पुलिस महानिदेशक ने विभिन्न सत्रों की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए, 2017 के बाद मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की परिवर्तनकारी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने भर्ती, प्रशिक्षण, आधारभूत संरचना, तकनीक-आधारित नागरिक सेवाओं, फॉरेंसिक सुदृढ़ीकरण, cyber policing, मिशन शक्ति केन्द्र, विशेष इकाइयों के गठन तथा अपराध के प्रति zero tolerance नीति के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि सम्मेलन का लक्ष्य प्रत्येक सत्र से स्पष्ट उत्तरदायित्व, निर्णयों की स्पष्ट timeline और ठोस परिणाम सुनिश्चित करना है, ताकि यह मंथन कक्षों से निकलकर फील्ड में दिखाई दे और नागरिकों तक बेहतर, responsive एवं citizen-first police service पहुँचे। सम्मेलन के प्रथम दिवस कुल 07 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रत्येक सत्र के 07 नोडल वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं उनकी टीम द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया ।
शनिवार को आयोजित सत्रों का सार –
• सत्र- 01 में Beat Policing विषय के नोडल अधिकारी एस०के० भगत, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा बीट पुलिसिंग से सम्बन्धित समस्या तथा उसके समाधान एवं Best practices के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया गया । तत्पश्चात माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा यक्ष ऐप का लोकार्पण किया गया । ‘यक्ष ऐप’- AI और Big Data Analysis की सहायता से तैयार किये गये बीट बुक का डिजिटल स्वरूप है। इसके माध्यम से बीट पर अपराध, अपराधियों तथा संवेदनशील क्षेत्रों का समग्र डाटा उपलब्ध होगा, जिससे पुलिस कार्यवाही अधिक तथ्यात्मक, विश्लेषणात्मक एवं लक्षित रूप में की जा सकेगी। यह ऐप बीट कर्मियों के रोज़मर्रा के कार्यों को आसान, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में भी मददगार होगा ।
•सत्र- 02 में Crime Against Women, Children and Human Trafficking विषय की नोडल अधिकारी पद्मजा चौहान, अपर पुलिस महानिदेशक, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा प्रदेश में महिलाओं एवं बच्चों से सम्बन्धित प्रमुख कार्य, उपलब्धियां, चुनौतियां एवं भावी कार्ययोजना जिसमें नवस्थापित मिशन शक्ति केन्द्र, समुदाय स्तर पर किये जा रहे जागरूकता कार्यक्रम एवं पारिवारिक विघटन के साथ लैंगिक अपराधों से पीड़ित बालिकाओं की देखभाल एवं संरक्षण, मिशन-शक्ति के द्वारा महिलाओं एवं बाल-सुरक्षा, मिशन-शक्ति केन्द्र के द्वारा सकारात्मक बदलाव, Family Dispute Resolution Clinic (FDRC), एवं बलात्कार के प्रकरणों में कानून प्रवर्तन पर प्रस्तुतीकरण दिया गया । इसके अतिरिक्त अपर पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन श्री अशोक मुथा जैन द्वारा बहू-बेटी सम्मेलन पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।
• सत्र- 03 में Police Station Management and Upgradation विषय के नोडल अधिकारी सुजीत पांडेय, पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा थाना स्तर की पुलिसिंग में तकनीकी उन्नयन हेतु ‘स्मार्ट एसएचओ डैशबोर्ड’ की विशेषताओं और उपयोगिताओं के साथ साथ इसको लागू करने के सम्बन्ध में आने वाली चुनौतियों तथा समाधान आदि के बारे में विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया । प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि उक्त एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से थाना प्रभारी सभी प्रमुख कार्यों पर नियंत्रण रख सकते है । इस डैशबोर्ड के क्रियान्वयन से नागरिक शिकायतों के समाधान के समय में भारी कमी, पुलिस कर्मियों के बीच जवाबदेही में वृद्धि, यातायात प्रवाह में सुधार और अपराध निगरानी में तेजी आयेगी ।
• सत्र- 04 में Cyber Crimes विषय के नोडल अधिकारी श्री बिनोद कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक, साइबर क्राइम के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा बढ़ रहे साइबर अपराध के प्रमुख कारणों, साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली इत्यादि की जानकारी देने के साथ-साथ साइबर अपराध की चुनौती से निपटने के लिए साइबर थाने व साइबर हेल्प डेस्क द्वारा किये जाने वाले प्रयासों तथा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र (I4C) के सहयोग से Capacity Building हेतु किये जा रहे प्रयासों के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया गया ।
• सत्र- 05 में Human Resource Development, Welfare, Police Behavior and Training विषय के नोडल अधिकारी पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण, राजीव सभरवाल के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा पुलिस कर्मियों के व्यवहार में सुधार हेतु विशेषज्ञ एजेंसियो के माध्यम से कराए गए प्रयास एवं प्रशिक्षण, उ०प्र० प्रान्तीय पुलिस सेवा (PPS) संवर्ग के अधिकारियों की सेवा सम्बन्धी समस्याओं एवं उसके निवारण, उत्तर प्रदेश पुलिस के कर्मियों एवं उनके आश्रित परिवार के स्वास्थ्य एवं कल्याण, कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा एवं जागरूकता हेतु वामासारथी द्वारा किये जा रहे सराहनीय प्रयासों एवं प्रचलित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, भारत सरकार के ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म- i-GOT पोर्टल पर उत्तर प्रदेश के पुलिसबल को प्रशिक्षण कोर्स कराये जाने के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण दिया गया ।
• सत्र- 06 में Prosecution and Prisons विषय के नोडल अधिकारी दिपेश जुनेजा, पुलिस महानिदेशक, अभियोजन के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा विभिन्न अपराधों की मॉनिटरिंग हेतु ई-रिर्पोटिंग पोर्टल को विकसित किए जाने, चिन्हित माफिया की प्रकरणवार मॉनिटरिंग हेतु डेडीकेटेड डैशबोर्ड बनाए जाने, नवीन आपराधिक विधियों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा हेतु डेडीकेटेड डैशबोर्ड बनाए जाने, अभियोजकों के दैनिक कार्यों के मूल्यांकन हेतु ई-प्रॉसीक्यूशन पोर्टल पर 12 के0पी0आई0 निर्धारित किए जाने, पेपरलेस व्यवस्था में अभियोजन द्वारा मानव संपदा पोर्टल, ई-ऑफिस तथा ई-प्रॉसीक्यूशन पोर्टल पर कार्य किए जाने के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण दिया गया । इसके अतिरिक्त डीजी कारागार प्रेम चन्द मीना द्वारा उत्तर प्रदेश की कारागारों का डिजिटलीकरण, डिजिटल तकनीक से पारदर्शिता, सुरक्षा, त्वरित न्यायिक प्रक्रिया, बंदियों का सुधार तथा प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से माननीय न्यायालय में 50,000 से अधिक गवाही कराये जाने, AI आधारित सीसीटीवी निगरानी, ई-मुलाकात, हेल्थ ए.टी.एम., डिजिटल लाइब्रेरी, समय पूर्व रिहाई सॉफ्टवेयर, ई-अभिरक्षा प्रमाणपत्र आदि नवाचारों और कार्यवाहियों के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण दिया गया ।
• सत्र- 07 में CCTNS 2.0, Nyay Sanhita and Forensics विषय के नोडल अधिकारी नवीन अरोड़ा, अपर पुलिस महानिदेशक, तकनीकी सेवायें के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा बढ़ते अपराधों की जटिलता, साइबर अपराधों में वृद्धि तथा नागरिकों की त्वरित न्याय की अपेक्षाओं के दृष्टिगत पुलिसिंग को अधिक डेटा-आधारित, वैज्ञानिक एवं नागरिक-केंद्रित बनाये जाने, CCTNS के माध्यम से पुलिस रिकॉर्ड, FIR एवं विवेचना से संबंधित डेटा का एकीकरण एवं नई न्याय संहिताओं के अंतर्गत e-FIR, Zero FIR, e-Summon एवं e-Sakshya जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण दिया गया ।



