UP में प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी

UP में प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी
अब रजिस्ट्री टाइटल बेस्ड होगी, यानी असली मालिक की पहले से पक्की जांच सरकार करेगी
धोखाधड़ी कम होगी, कोर्ट केस कम होंगे, और रजिस्ट्री झटपट होगी
सरकार ने कोनसा नियम बदला है?
अब तक यूपी में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री सिर्फ उन कागज़ों के आधार पर होती थी जो कोई भी लेकर आ जाए
कई बार फर्जी कागज़ों से रजिस्ट्री हो जाती थी, और बाद में असली मालिक कोर्ट के चक्कर काटते रहते थे
अब यूपी सरकार टाइटल-बेस्ड रजिस्ट्रेशन ला रही है, यानी रजिस्ट्री से पहले सरकार खुद जांचेगी कि मालिक असली है या नहीं
इससे फायदा क्या होगा?
– पहले यूपी में रजिस्ट्री उनही दस्तावेज़ों पर हो जाती थी, जो पार्टियाँ लेकर आती थीं
– दिल्ली और हरियाणा में पहले से सिस्टम है कि मालिकाना हक़ साबित करना पड़ता है, तभी रजिस्ट्री होती है
– अब यूपी में भी रजिस्ट्री अफसर सीधे रेवेन्यू और नगर निगम के रिकॉर्ड से मालिकाना हक़ चेक कर सकेंगे
– यानी जिसके नाम पर ज़मीन/मकान है, सिर्फ वही बेच सकेगा
सरकार ने ये कदम क्यों उठाया?
यूपी सरकार ने विभाग को आदेश दिया था कि धोखाधड़ी रोकने के लिए टेक्नोलॉजी और कानून दोनों मजबूत किए जाएँ
क्योंकि अभी:
– कोई किसी की जगह भेस बदल कर प्रॉपर्टी बेच देता है
– एक ही जमीन की दो-दो रजिस्ट्री हो जाती है
– रिकॉर्ड अलग-अलग दफ्तरों में बिखरे रहते हैं
– और ऐसे मामलों में हजारों मुकदमे चल रहे हैं
टाइटल-बेस्ड vs डॉक्यूमेंट-बेस्ड रजिस्ट्रेशन
डॉक्यूमेंट-बेस्ड सिस्टम (पुराना सिस्टम) – रजिस्ट्री सिर्फ यह दिखाती है कि लेन-देन हुआ है, ये नहीं बताती कि बेचने वाले के पास वाकई में मालिकाना हक़ था या नहीं
टाइटल-बेस्ड सिस्टम (नया सिस्टम) – सरकार खुद जांचेगी कि बेचने वाला असली मालिक है या नहीं, फर्जी कागज़, डुप्लीकेट रजिस्ट्री और धोखे की गुंजाइश बहुत कम
हाँ, लेकिन…
कुछ ऐसे कागज़ या एग्रीमेंट जो रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी नहीं होते (Registration Act, 1908 के तहत), उन पर खरीदार को खुद सावधान रहना पड़ेगा
> यानी सरकार टाइटल चेक करेगी, लेकिन फिर भी खरीदते समय अपनी जांच-पड़ताल जरूरी है



