
✍️ आशीष मिश्र
वाराणसी:- विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग द्वारा रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमैनिटीज तथा इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल ट्रांसलेशन, कुताफिन मॉस्को स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य *इंटरनेशनल ऑनलाइन पोएट्री फेस्टिवल* का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत और रूस के विद्वानों, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।



कार्यक्रम की शुरुआत रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमैनिटीज के इंटरनेशनल सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक अलेक्जेंडर स्टोल्यारोव के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मातृभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।


गिरजानंद चौधरी विश्वविद्यालय, गुवाहाटी के माननीय कुलपति प्रोफेसर कर्णपा दास ने अपने वक्तव्य में जीवन में मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मातृभाषा व्यक्ति की संवेदनाओं, संस्कृति और पहचान का आधार होती है। रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमैनिटीज की हिंदी विभाग की प्रोफेसर प्रो. इंदिरा ने भी कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा हिंदी और रूसी भाषाओं के बीच अकादमिक सहयोग की सराहना की।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग की अध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज धनखड़ ने भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल” का उल्लेख करते हुए मातृभाषा की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मातृभाषा न केवल ज्ञान का माध्यम है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव का सशक्त साधन भी है।
कार्यक्रम में रूसी भाषा के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों तथा अंग्रेजी साहित्य के स्नातकोत्तर छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। विद्यार्थियों ने हिंदी, भोजपुरी आदि मातृभाषाओं में स्वरचित कविताओं का पाठ किया तथा हिंदी के प्रसिद्ध कवियों—मैथिलीशरण गुप्त, हरिवंश राय बच्चन और भारतेंदु हरिश्चंद्र—की रचनाओं का प्रभावशाली वाचन किया।
इस अवसर पर जिन विद्यार्थियों ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की, उनमें सुंदरी मौर्या, प्रियाशी यादव, प्रियाशी मिश्रा, कामना प्रजापति, अनुराग यादव, आदित्य गुप्त, निधि गुप्ता, निखिल, साक्षी, छाया, वर्तिका, आयुषी, कौशिकी, आरती, सूरज तथा स्वाति प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी प्रतिभागियों ने मातृभाषा के प्रति अपने प्रेम और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
साथ ही रूस के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों ने भी अपनी-अपनी मातृभाषाओं में विभिन्न कवियों की कविताओं का पाठ कर कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
यह आयोजन भाषाई विविधता, सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण साबित हुआ। विश्व मातृभाषा दिवस के इस अवसर पर आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय कविता महोत्सव सभी प्रतिभागियों के लिए एक यादगार और प्रेरणादायी अनुभव रहा।



