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AI और मौसम पूर्वानुमान बदल रहे खेती का चेहरा, किसानों को मिल रही समय पर मदद —

 

दिल्ली:– भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका है और देश की बड़ी आबादी सीधे तौर पर खेती पर प्रतिबंध लगाती है। लंबे समय से भारतीय किसान खेती से जुड़े अपने अनुभव, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय मौसम के आधार पर निर्णय ले रहे हैं। लेकिन अब जलवायु परिवर्तन, औसत वर्षा, बढ़ती तापमान और जलवायु में वृद्धि जारी कीट और रोग कृषि क्षेत्र के सामने नए सिरे से स्थापित हो रहे हैं।

इन बयानों से जारी के लिए अब मौसमी सिस्टम, आर्टिफिशियल एसोसिएटेड सैटेलाइट डेटा और डिजिटल कृषि तकनीशियनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ये आधुनिक तकनीकें किसानों को समय पर सही जानकारी देकर बेहतर निर्णय लेने में मदद कर रही हैं।

किसानों को मिल रही रिकार्ड और समय पर जानकारी –

आज ऐसे कई डिजिटल उपकरण और तकनीकी मंच उपलब्ध हैं, जो किसानों को मौसम, वर्षा, तापमान, गुणवत्ता, मिट्टी की स्थिति, बेरोजगारी के लक्षण और व्यापारियों की विश्वसनीयता से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। ये सिस्टम सीज़न डेटा, सैटेलाइट इमेजरी, सेंसर और कृत्रिम प्रतिभा (एआई) की मदद से खतरों का आकलन करते हैं और किसानों को पहले से सावधान कर देते हैं। इससे किसान समय रहते जरूरी कदम उठा सकते हैं और फसल को नुकसान से बचा सकते हैं।

किट और रोग प्रबंधन में मिल रही मदद –

विशेषज्ञ के अनुसार, कई बार सीज़न की बिज्जू मछली में फंगल या बैक्टीरिया के प्रकोप के लिए अनुकूल हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में एआई आधारित सिस्टम किसानों को पहले ही ऑर्डर भेज सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में मौसम ऐसा बन गया है जिससे फसल में फसल रोग या कीट आक्रमण बढ़ गया है, तो किसानों को मोबाइल फोन या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सूचना मिल सकती है। इससे वे समय रहते औषधियों का सहायक या अन्य बचाव उपाय कर सकते हैं। इस तरह से विनाशकारी नुकसान होता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

समुद्र तट से आसान हुई खेती की योजना –

मौसम और जलवायु समुच्चय का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान मौसम के अनुसार अपनी खेती की रणनीति बना सकते हैं। मौसम कृषि उत्पाद को सीधे प्रभावित करता है। वर्षा, तापमान या मसालों में मामूली बदलाव भी फसल की उपज पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में किसानों की मदद से किसान यह तय कर सकते हैं कि यहां की खेती कब की जाती है, बेस्ट खेती कब की जाती है, सीना का सही समय क्या होगा, मसालों की खेती कब की जाती है, किसानों की खेती कब की जाती है, इसकी खेती अधिक वैज्ञानिक और विक्रेता बन रही है।

प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में सहायता –

कई बार अचानक आने वाले तूफान, भारी बारिश, ओलावृष्टि या तेज घटनाएं किसानों को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। लेकिन मौसम आधारित चेतावनी चेतावनी इन शेयरों की पहले से जानकारी विक्रेता किसानों को तैयार रहने का मौका मिलता है। यदि किसान को पहले से पता हो कि अगले कुछ दिनों में भारी बारिश या तेज तूफान आने वाला है, तो वह अपनी फसल, कृषि उपकरण और समुद्र को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा सकता है। इससे आर्थिक क्षति काफी हद तक कम हो सकती है।

डिजिटल खेती की ओर बढ़ रहा भारत –

सरकार और कई निजी संस्थाएं, किसान तक डिजिटल टेक्नोलॉजीज के लिए नामांकन के लिए लगातार काम कर रही हैं। मोबाइल ऐप, प्रोटोटाइप, वर्मीडर्स और एआई आधारित कृषि मंच किसानों के लिए नए स्टॉक खोले जा रहे हैं।
विशेषज्ञ का मानना ​​है कि आने वाले समय में भारतीय कृषि में कृषि, कृषि और कृषि उत्पादों को और अधिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।

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