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ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार के इस्तेमाल पर ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया –

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी, सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद बढ़ी तनातनी -

 

 

 

दिल्ली:-  अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया दी।

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की संभावना को खारिज कर दिया है। इस पर ट्रंप ने सवाल को ‘बेवकूफी भरा सवाल’ बताते हुए कहा कि ईरान सैन्य रूप से पूरी तरह हार चुका है। ट्रंप ने सवाल किया कि जब अमेरिका ईरान को हरा चुका है तो उसके खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल क्यों किया जाएगा।

ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के लारक आइलैंड में दो रॉकेट लॉन्चरों पर बमबारी की। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

रिपोर्ट के अनुसार करीब एक महीने में यह पहला मौका था, जब दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए।

इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। हालांकि, सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।

ईरान पर दबाव बढ़ा रहा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाने की नीति अपना रहे हैं। हाल में अमेरिका की ओर से ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करने की घोषणा की गई।

ट्रंप ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी कई बार बयान दिए हैं। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

बातचीत के लिए ईरान तैयार, लेकिन शर्तों के साथ

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हाल में एक इंटरव्यू में अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह इस प्रक्रिया को लेकर सतर्क है।

पेजेशकियन के मुताबिक बातचीत आगे बढ़ सकती है, अगर ईरान की ओर से उठाए गए कदमों के जवाब में अमेरिका भी बराबर और उचित कदम उठाए।

उन्होंने यह भी कहा कि शांति समझौते के तहत ईरान अपने वादों को तभी पूरा करेगा, जब अमेरिका भी अपने हिस्से की प्रतिबद्धताओं को पूरा करे। हालांकि, ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया कि बातचीत के दौरान दोनों पक्ष अपने सभी उद्देश्यों को हासिल कर पाएं, यह जरूरी नहीं है।

आगे क्या?

एक ओर अमेरिका ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान बातचीत के लिए सशर्त तैयारी की बात कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा।

फिलहाल ट्रंप के बयान से इतना स्पष्ट है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना से जुड़े सवाल को खारिज करने की दिशा में जवाब दिया है, जबकि दोनों देशों के बीच तनाव और सैन्य गतिविधियां जारी हैं।

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