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काशी विद्यापीठ में रूसी भाषा एवं संस्कृति पर आधारित तीन सप्ताह के शैक्षणिक कार्यक्रम का शुभारंभ –

 

 

वाराणसी:- महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग तथा रूस के कोज़मा निझनी नोवगोरद स्टेट पेदगोजिकल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 31 अगस्त से 20 सितंबर 2026 तक चलने वाले तीन सप्ताह के शैक्षणिक कार्यक्रम ‘रूसी भाषा और संस्कृति पर आधारित कोर्स’ का सोमवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम मानविकी संकाय स्थित स्मार्ट क्लासरूम में कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रूस के कोज़मा निझनी नोवगोरद स्टेट पेदगोजिकल विश्वविद्यालय की प्रो. नतालिया श्मिलेवा तथा विशिष्ट अतिथि सुश्री दारया वारिनत्सोवा रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों एवं कुलपति का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम की समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज धनकड़ ने अंग्रेजी और रूसी भाषा में अतिथियों का औपचारिक स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कुलपति के मार्गदर्शन में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और रूसी विश्वविद्यालय के बीच एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसी क्रम में काशी विद्यापीठ में कोज़मा निझनी नोवगोरद स्टेट पेदगोजिकल विश्वविद्यालय का केंद्र भी स्थापित किया गया है, जिसके अंतर्गत इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस कोर्स में रूसी भाषा का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों के साथ विश्वविद्यालय के अन्य छात्र भी शामिल हो सकते हैं। पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी रूस की सभ्यता, संस्कृति, कला और साहित्य को समझ सकेंगे।

इस अवसर पर अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग में रूसी भाषा का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों ने रूसी गीत की मनोहारी प्रस्तुति दी, जिसे देखकर अतिथि अभिभूत हुए।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रूस भारत का सदैव घनिष्ठ मित्र रहा है और आजादी के बाद से दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग एवं साझेदारी रही है। उन्होंने कहा कि भाषा संप्रेषण का सबसे प्रभावी माध्यम है, जिसके जरिए किसी देश की संस्कृति, कला, साहित्य और विज्ञान को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

कुलपति ने भारत और रूस की संस्कृतियों में समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की संस्कृतियां स्वतंत्र रूप से विकसित हुई हैं। उन्होंने एमओयू का हवाला देते हुए रूसी भाषा का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को रूस जाने का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करने की बात कही, ताकि विद्यार्थी वहां की संस्कृति और भाषा की बारीकियों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।

उन्होंने कहा कि रूस में हिंदी भाषा के प्रति भी सम्मान और रुचि बढ़ रही है। इसी को देखते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में विदेशियों के लिए हिंदी भाषा के पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

मुख्य अतिथि प्रो. नतालिया श्मिलेवा ने भारत आने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि रूसी भाषा बेहद सुंदर है और सीखने की रुचि होने पर यह आसान भी लगने लगती है। विशिष्ट अतिथि दारया वारिनत्सोवा ने भी भारत और काशी विद्यापीठ आने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रूसी उनके लिए विदेशी भाषा है, लेकिन वह इसे सरल और रुचिकर तरीके से सिखाने का प्रयास करेंगी।

कार्यक्रम का संचालन रूसी भाषा की छात्राओं प्रियांशी मिश्रा और प्रियांशी यादव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किरण सिंह ने किया।

उद्घाटन सत्र में संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र, प्रो. निशा सिंह, उप संकायाध्यक्ष प्रो. नलिनी श्याम कामिल, चीफ प्रॉक्टर डॉ. अम्बरीश राय, प्रो. रामाश्रय सिंह, डॉ. नवरत्न सिंह, डॉ. कविता आर्या, प्रो. नंदिनी सिंह, श्री प्रियोदीप हलधर सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, प्रोफेसर एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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