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सांगवेद संस्कृत महाविद्यालय में श्रावणी उपाकर्म एवं ऋषि पूजन श्रद्धापूर्वक संपन्न  – 

 

नवीन तिवारी – 

 

वाराणसी:-  सांगवेद संस्कृत महाविद्यालय में श्रावणी उपाकर्म का धार्मिक एवं वैदिक आयोजन गुरु-शिष्यों की उपस्थिति में श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वैदिक परंपरा के अनुसार ऋषि पूजन, संकल्प तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए गए। इस दौरान महाविद्यालय का वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय बना रहा।

श्रावणी उपाकर्म सनातन वैदिक परंपरा का महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। विशेष रूप से वेदाध्ययन करने वाले विद्यार्थियों और आचार्यों के लिए इसका विशेष महत्व है। उपाकर्म के माध्यम से अध्ययन-अध्यापन की नई शुरुआत, आत्मशुद्धि तथा ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

     

कार्यक्रम के दौरान आचार्यों के निर्देशन में विद्यार्थियों ने विधिपूर्वक उपाकर्म की प्रक्रिया में सहभागिता की। ऋषियों का पूजन कर वैदिक ज्ञान परंपरा के प्रति श्रद्धा अर्पित की गई। गुरुजनों ने विद्यार्थियों को उपाकर्म के आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में ऋषियों ने ज्ञान, संस्कार और धर्म की परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य किया है।

गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रकाश डालते हुए आचार्यों ने कहा कि संस्कृत और वेद केवल प्राचीन ज्ञान के स्रोत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों की आधारशिला हैं। उपाकर्म का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी ज्ञान परंपरा से जोड़ना और अध्ययन के प्रति नई ऊर्जा एवं संकल्प प्रदान करना भी है।

महाविद्यालय के शिष्यों ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरुजनों ने विद्यार्थियों को अनुशासन, संस्कार, सत्य, सदाचार और निरंतर अध्ययन के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के आचार्यगण, विद्यार्थी एवं अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन ने गुरु-शिष्य परंपरा, वेदाध्ययन और भारतीय ज्ञान संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।

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