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रक्षा क्षेत्र में FDI नियमों में ढील की तैयारी, 2029 तक ₹50,000 करोड़ निर्यात का लक्ष्य –

74% तक FDI अभी ऑटोमैटिक रूट से, सरकार अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के विकल्पों पर कर रही विचार -

 

 

 

दिल्ली:-  भारत के रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार FDI नियमों में और ढील देने पर विचार कर रही है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) इस संबंध में संबंधित पक्षों और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है। सरकार का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत ने रक्षा उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं।

सरकारी स्तर पर नियमों में संभावित बदलाव को लेकर अभी चर्चा चल रही है। अंतिम फैसला होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विदेशी निवेशकों के लिए मौजूदा शर्तों में किस तरह की राहत दी जाती है।

अभी 74% तक FDI ऑटोमैटिक रूट से

मौजूदा नीति के तहत रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत तक FDI ऑटोमैटिक रूट से किया जा सकता है। इसके लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होती।

74 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी आवश्यक है। मौजूदा नीति में ऐसे निवेश को विशेष परिस्थितियों में अनुमति दी जाती है, खासकर जब उससे भारत को आधुनिक तकनीक या अन्य रणनीतिक लाभ मिलने की संभावना हो।

रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए सुरक्षा संबंधी मंजूरी और रक्षा मंत्रालय के निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन भी जरूरी है।

अब तक सिर्फ 32.29 मिलियन डॉलर FDI

रक्षा क्षेत्र में FDI बढ़ाने की सरकार की कोशिश के बीच अब तक आए विदेशी निवेश का आंकड़ा अपेक्षाकृत सीमित है।

अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत के रक्षा उद्योग में करीब 32.29 मिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया है। ऐसे में सरकार की ओर से FDI व्यवस्था में संभावित बदलाव को रक्षा क्षेत्र में विदेशी पूंजी और तकनीक आकर्षित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये पहुंचा

भारत के रक्षा निर्यात में पिछले वर्षों में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में रक्षा निर्यात 686 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया।

वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 17,353 करोड़ रुपये यानी 45.16 प्रतिशत रही। वहीं रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों का निर्यात 21,071 करोड़ रुपये यानी 54.84 प्रतिशत रहा।

2029 तक 50 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य

सरकार ने वर्ष 2029 तक सालाना 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही इसी अवधि तक 3 लाख करोड़ रुपये के सालाना रक्षा उत्पादन का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ विदेशी निवेश और तकनीकी सहयोग को भी महत्वपूर्ण मान रही है।

रक्षा बजट में भी बढ़ोतरी

रक्षा क्षेत्र में उत्पादन और आत्मनिर्भरता बढ़ाने की नीति के साथ केंद्र सरकार ने रक्षा बजट में भी बढ़ोतरी की है।

वर्ष 2013-14 में रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

अब सरकार के फैसले पर नजर

रक्षा क्षेत्र में FDI नियमों में प्रस्तावित बदलाव अभी विचार के स्तर पर है। DPIIT की ओर से संबंधित पक्षों और विशेषज्ञों से सुझाव लिए जा रहे हैं। ऐसे में आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार विदेशी निवेश की मौजूदा सीमा और मंजूरी प्रक्रिया में क्या बदलाव करती है।

FDI नियमों में संभावित ढील, 2029 के ₹50,000 करोड़ निर्यात लक्ष्य और बढ़ते घरेलू रक्षा उत्पादन के बीच भारत की रक्षा अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी और तकनीकी सहयोग की भूमिका पर अब सरकार के अगले फैसले की नजर रहेगी।

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