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राहुल गाँधी हिन्दू धर्मशास्त्रविरोधी मानसिकता,असत्य प्रचार एवं भ्रम छोड़ें – शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती

 

नवीन तिवारी-  

वाराणसी   :- पुणे / सलधा/ के अपने गूँज कार्यक्रम में केन्द्रीय विपक्षनेता राहुल गाँधी द्वारा हिन्दुओं के प्रमुख धर्मशास्त्र मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों पर दिया गया बयान उनकी घोर अज्ञानता,सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को उजागर करता है। राजनीतिक लाभ पाने के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को सन्दर्भ से पेश करना केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान ही नहीं,बल्कि समाज को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास है।

यह बातें शंकराचार्य महाराज ने राहुल
गाँधी द्वारा दिए गए मनुस्मृति वाले वक्तव्य पर रोष प्रकट करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि,शास्त्रीय एवं व्यावहारिक दृष्टि से
जिस श्लोक “पिता रक्षति कौमारे,भर्ता रक्षति यौवने…” को राहुल गाँधी ने अनुचित रूप से उद्धृत किया,वह स्त्री की परतन्त्रता का नहीं,बल्कि वृत्ति स्वातन्त्र्य की बात है जो स्त्रियों के सम्मान को बढ़ाती है।

   

राहुल गांधी के लगातार मनुस्मृति विरोधी बयानों से यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि उनकी मानसिकता मूलतः हिन्दू धर्मशास्त्रों और सनातन जीवन-दृष्टि के विरोध की है।संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक मनुस्मृति और धर्मशास्त्रों के विषय में बार-बार असत्य व भ्रामक प्रचार करने के कारण ही हमने पूर्व में उन्हें ‘हिन्दू धर्म से बहिष्कृत’ घोषित किया था।हम उन्हें चेतावनी देते हैं कि वे अपनी इस धर्मविरोधी और शास्त्रविरोधी बयानबाजी से बाज आएं।यदि वे और उनकी कांग्रेस पार्टी बिना पूर्ण शास्त्रीय अध्ययन और बोध के सनातन धर्मग्रंथों पर इसी प्रकार भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियां करते रहे,तो देश का प्रबुद्ध और सनातनप्रेमी समाज उनकी इस वैचारिक अपरिपक्वता का तीव्र और मुखर विरोध जारी रखेगा।”

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