
वाराणसी:- प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवंत कृपा से मै इस यथावत अपने पुरातन स्वरूप को संजोए रहने वाली लीला का साक्षी बना।
आज रामलीला पक्की पर प्रथम श्री गणेश पूजन संपन्न हुआ। विघ्नहर्ता गणपति और वीर बजरंगबली जी को विराजमान करके लीला का प्रथम पूजन संपन्न किया गया। जिस लीला के साक्षी स्वयं राम जी सीता जी सहित अपने सभी अंशों के साथ बालक रूप में विराजमान होते हों ।


उस लीला का विश्वव्यापी होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। ऐसा ही लीला प्रेमियों का विश्वास होता है। एक तरफ नए पीढ़े पर ब्रश, बंसुला, कैंची (रामलीला के पुतलों मंच, आदि को रंगने के लिए प्रयोग किये जाने वाले औजार) तथा दूसरी तरफ रामलीला के संवाद की पोथी (लाल कपड़े में बंधी)सभी का पूजन किया जाता है। जैसे कोई भी शुभ कार्य करने से पहले उनमें प्रयोग होने वाले सभी तत्वों को हम भगवंत स्वरूप मानकर पूजन करते है। उसी प्रकार रामनगर लीला में भी किया जाता है। इसलिए यह लीला कोई मंचन नहीं स्वयं में पूर्ण रूप से अनुष्ठान है और यही तो हमारे सनातन धर्म की अद्भुत विधा है।अब आज से ही रामलीला पंच स्वरूप की शिक्षा दीक्षा शुरू कर दी जाएगी। जिसमें रामलीला व्यास जी द्वारा रामलीला संवाद और हाव भाव का प्रकट करना,अनुशासन तथा लीला के प्रति भाव जाग्रत करने का अद्भुत निरूपण किया जाना प्रारंभ कर दिया जाएगा। सभी लीला प्रेमी ,नेमी अपने भगवान के आगमन पर बहुत प्रसन्न है। सभी लीला प्रेमी, लीला के शुभारंभ दृश्य के साक्षी बनकर भगवन लीला के दरश की इच्छा को मन में बिठाए पुनः माया संसार में वापस लौट गए।
जय सिया राम जी की –
हर हर महादेव



