
प्रयागराज :- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और प्रभावशाली लोगों को जारी शस्त्र लाइसेंसों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने भाजपा नेता , , समेत कई बाहुबली नेताओं के शस्त्र लाइसेंसों की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने उन प्रभावशाली लोगों की आपराधिक कुंडली भी तलब की है, जिनके नाम सरकारी हलफनामों से गायब पाए गए हैं।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संत कबीर नगर निवासी जयशंकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से 26 मई तक बाहुबलियों को मिली सरकारी सुरक्षा, तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या और उनके पास मौजूद असलहों का पूरा ब्यौरा मांगा है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के आवंटन और नवीनीकरण को लेकर मंडलवार रिपोर्ट तलब की थी। सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में खुलासा हुआ कि उत्तर प्रदेश में इस समय 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं, जबकि 23,407 आवेदन लंबित हैं। इसके अलावा 6,062 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमों वाले लोगों को भी लाइसेंस जारी किए गए। वहीं 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस पाए गए हैं।
कोर्ट ने अधिकारियों की रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस प्रशासन कई बार राजनीतिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली लोगों की जानकारी छिपा लेता है। इसी कारण कोर्ट ने जोनवार अपराधियों के साथ कई राजनेताओं और बाहुबलियों के लाइसेंसों की विशेष जांच के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों और पुलिस कमिश्नरों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि वे लिखित अंडरटेकिंग दें कि कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है। यदि किसी स्तर पर जानकारी छिपाई गई तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।



