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संस्कृति संरक्षण व जनकल्याण में अहिल्याबाई होल्कर का महत्वपूर्ण योगदान : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी –

 

✍️आशीष मिश्र

 

वाराणसी:- पुण्यश्लोक लोकमाता रानी अहिल्या बाई होलकर की 300वीं जयंती के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित और महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं बिंदेश्वरी ग्रामोत्थान संस्थान, अमेठी, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। शिक्षाशास्त्र संकाय, काशी विद्यापीठ के ज्योतिबा फुले सभागार में आयोजित कार्यक्रम के पहले दिन देश की महान महिला शासक अहिल्या बाई होल्कर के जीवन, कार्यों और उनके धार्मिक एवं सांस्कृतिक योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई। अध्यक्षता करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि इतिहास में अनेक महान व्यक्तित्व हुए, परंतु मंदिरों के पुनर्निर्माण, समाज सुधार, संस्कृति संरक्षण और जनकल्याण के क्षेत्र में अहिल्याबाई होल्कर का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि जब देश का समाज भय और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था, तब अहिल्या बाई होल्कर ने अपने नेतृत्व से समाज में आशा, विश्वास और पुनर्निर्माण की भावना जगाई। उन्होंने कहा कि अहिल्या बाई का संदेश है कि हार मानना समाधान नहीं, बल्कि पुनः प्रयास करना ही विजय का मार्ग है।

प्रो. त्यागी ने कहा कि आज लोग बाहरी खुशी का दिखावा करते हैं, जबकि भीतर मानवीय गुण कमजोर होते जा रहे हैं। ऐसे समय में पुरातन मूल्यों को पुनः अपनाना आवश्यक है। उन्होंने छोटे बच्चों का उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे बच्चे देखकर सीखते हैं, वैसे ही समाज को सही दिशा देने के लिए इतिहास में कई महान व्यक्तित्व जन्मे, जिनमें अहिल्याबाई होल्कर का स्थान विशेष है। त्रेता और द्वापर का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि अच्छाई और बुराई दोनों विद्यमान रहती हैं, पर अंततः विजय सदैव अच्छाई की होती है। उन्होंने युवाओं से उद्देश्यपूर्ण जीवन अपनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि के उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने कहा कि काशी विद्यापीठ ऐसी पहली संस्था है, जिसने काशी विश्वनाथ मंदिर के नवजीवन और विकास की बात प्रमुखता से उठाई। उन्होंने कहा कि महान वह नहीं जो मंदिरों को तोड़े, बल्कि महान वह है जो उनका पुनर्निर्माण कर समाज को नई दिशा प्रदान करे। उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा आक्रमणों से प्रभावित था, तब अहिल्या बाई होल्कर ने न केवल अपने क्षेत्र को सुरक्षित रखा, बल्कि उन सभी प्रमुख मंदिरों का नव-निर्माण करवाया जिन्हें इतिहास में क्षति पहुंची थी।

रविंद्र जायसवाल ने सामाजिक कुरीतियों जैसे सती प्रथा और बाल विवाह के संदर्भ में इतिहास के परिवेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि कई प्रथाएं परिस्थितियों के अनुसार शुरू हुईं, परंतु समय के साथ वे परंपरा में बदलकर अनुचित रूप धारण कर गईं। उन्होंने कहा कि समाज को इनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम के भव्य पुनर्विकास की सराहना करते हुए कहा कि इस परिवर्तन ने न केवल भक्तों के लिए सुविधा बढ़ाई है, बल्कि काशी की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान की है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम नाट्यकला विभाग की आकांक्षा गणेश एवं शिव वंदना की भक्तिमय प्रस्तुति दी। साथ ही उन्होंने माता अहिल्या बाई की जीवनी पर आधारित संगीतमय नृत्य प्रस्तुति से वातावरण देश भक्ति से भर दिया। स्वागत पं. दीन दयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रो. कृष्ण कुमार सिंह, विषय प्रवर्तन बिंदेश्वरी ग्रामोत्थान संस्थान के बिंदेश्वरी दुबे, संचालन अंजना झा एवं धन्यवाद ज्ञापन महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने किया।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र राम, प्रो. रमाकांत सिंह, डॉ. शुभ्रा, डॉ. प्रभा शंकर मिश्र, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. दयानन्द, डॉ. संतोष मिश्र, डॉ. नागेंद्र पाठक, डॉ. जय प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. शिवजी सिंह, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. शिव यादव, डॉ. वैष्णवी शुक्ला, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. चंद्रशील पाण्डेय, विजय सिंह, खुश्बू सिंह, देवेन्द्र गिरि, अतुल उपाध्याय, प्रशांत शर्मा, पुलकित, जुली, रिया, अनुष्का, जान्हवी, कोमल, साजिया, स्वेता, शिवेंद्र, मनीष, वारिसा, हर्ष, पीयूष, लुकमान, वंशिका, दिशान आदि उपस्थित रहे।

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