शेख हसीना के खिलाफ बांग्लादेश की इंटरनेशनल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई –

दिल्ली:- बांग्लादेशी की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई गई है। पहले से ही माना जा रहा था कि उन्हें सख्त सजा दी जा सकती है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पहले ही शेख हसीना की अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा चुकी है। ऐसे में शेख हसीना को ऐसी सजा सुनाकर बांग्लादेश में उनके वापसी के रास्ते को हमेशा के लिए बंद करने की कोशिश की गई है। कोर्ट ने कहा कि सबूतों से ये क्रिस्टल क्लियर है कि शेख हसीना ने प्रदर्शनकारियों को भड़काया, फिर उनके साथ बर्बरता की, उनकी हत्या में शेख हसीना का हाथ है। आंदोलन को क्रूरता से कुचलने की कोशिश की। शेख हसीना ने ढाका यूनिवर्सिटी के VC को टेलीफोन करके हत्याएं करने की धमकी दी। शेख हसीना को 1400 हत्याओं का दोषी ठहराया गया है। शेख हसीना के साथ गृहमंत्री को भी फांसी की सजा सुनाई गई है।
शेख हसीना पर बांग्लादेशी कोर्ट का फैसला –
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों के पांच आरोपों पर अपना फैसला सुनाया है। ये आरोप जुलाई-अगस्त 2024 में आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन से जुड़ी अशांति से उत्पन्न हुए हैं। शेख हसीना और उनके सहयोगियों के खिलाफ 8747 पन्नों के आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल गये थे, जिनमें पीड़ितों के बयान, जब्त किए सबूत और पीड़ितों की पूरी लिस्ट होने की बात कही गई थी। इसी आधार पर ICT ने शेख हसीना के खिलाफ फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सरकारी गवाह बनने के लिए पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को माफ कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि उन्होंने पूरा खुलासा किया है और कोर्ट के सामने में सच्चाई रखी है।

शेख हसीना ने घातक हमले के आदेश दिए- कोर्ट –
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICT) ने बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर जुलाई को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। इन तीनों के ऊपर विद्रोह के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराध करने का आरोप लगाने वाले मामले में फैसला आया है। ICT के न्यायमूर्ति गुलाम मुर्तुजा मोजुमदार की अध्यक्षता में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 की तीन सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाया है। बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार, ICT ने किसी शासनाध्यक्ष के खिलाफ फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि शेख हसीना ने छात्रों के प्रदर्शन को कुचलने का आदेश दिया था। शेख हसीना के आदेश के बाद छात्र प्रदर्शनकारियों के आंदोलन को बुरी तरह से कुचला गया। छात्रों के प्रदर्शन को क्रूरता से कुचला जा रहा है इसकी जानकारी शेख हसीना को थी। कोर्ट ने कहा है कि शेख हसीना ने हेलीकॉप्टर से प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों के इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी और उनके आदेश पर ही ड्रोन से प्रदर्शनकारियों पर नजर रखी गई। जिसकी वजह से 1400 प्रदर्शनकारी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, उन्हें घातक हथियारों का इस्तेमाल करके मौत के घाट उतारा गया। इसीलिए शेख हसीना, असदुज्जमां खान कमाल (तत्कालीन गृह मंत्री) और चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून (तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक) को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।



