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लखनऊ विश्वविद्यालय में ज्येष्ठ मंगल पर सुंदरकांड पाठ एवं विशाल भंडारे का आयोजन — 

 

 

लखनऊ :-  लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलानुशासक कार्यालय द्वारा आज ज्येष्ठ मास के तृतीय मंगलवार के शुभ अवसर पर एक विशाल धार्मिक आयोजन सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय गेट संख्या 02 पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रात: 8:00 बजे से सुंदरकांड पाठ तथा दोपहर 10:30 बजे से भंडारे का आयोजन किया गया। इस शुभ अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के समस्त सदस्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में भागीदारी की।

सुबह प्रात: 8:00 बजे सुंदरकांड पाठ का शुभारंभ विधि-विधान से हुआ। तुलसीदास रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ श्रद्धापूर्ण वातावरण में किया गया, जिसमें संगीतमय भजन-कीर्तन भी साथ में चले। पाठ के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में अनुष्ठान का पावन वातावरण छा गया और श्रद्धालुओं ने इसमें आस्था के साथ भाग लिया।
सुंदरकांड पाठ की समाप्ति के पश्चात् विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय (प्रो. जे. पी. सैनी) के कर-कमलों द्वारा आरती के पश्चात महाप्रसाद का छात्र छात्राओ का वितरण स्वयं किया गया, जो विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सीमाओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
इस धार्मिक अनुष्ठान में विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों, अध्यापकों, शोधार्थियों, कर्मचारियों तथा नगर के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने मिलकर विश्वविद्यालय पारिवारिक एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। मंगलवार के इस पावन दिन भगवान हनुमान जी की आराधना के साथ-साथ समस्त सहभागियों ने लोककल्याण और विश्वविद्यालय के उत्तरोत्तर विकास के लिए प्रार्थना की।
विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय ने इस अवसर पर कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन विश्वविद्यालय परिवार में सकारात्मक उर्जा और पारस्परिक सौहार्द का संचार करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास की रामकथा हमें नैतिक बल, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती है। इस तरह के आयोजन विश्वविद्यालय की आस्था और संस्कृति की परंपरा को सुदृढ़ करते हैं।
कुलानुशासक कार्यालय के अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का अंग हैं। ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है, जिसमें विश्वविद्यालय समुदाय के सभी वर्गों के लोग उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। यह आयोजन स्थानीय सांस्कृतिक चेतना और शैक्षिक वातावरण की समृद्धि में सहायक सिद्ध होता है।
कुलानुशासक कार्यालय ने समस्त नगरवासियों और विश्वविद्यालय से जुड़े सभी लोगों को इस धार्मिक अनुष्ठान में सादर आमंत्रित किया था।

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