
लखनऊ:- लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान (जूलॉजी) विभाग द्वारा ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रोनोमेडिसिन’ (ISCM), इसके ‘ISCM-FBRL रिदम सेंटर’ तथा ‘न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया’ (NCI) के संयुक्त तत्वावधान में आज ‘विश्व सर्केडियन दिवस 2026’ (World Circadian Day 2026) का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। इस वर्ष यह विशेष दिवस “सभी के लिए सर्केडियन स्वास्थ्य: स्वस्थ बचपन से स्वस्थ वृद्धावस्था तक” (Circadian Health for All: From Healthy Childhood to Healthy Ageing) के अत्यंत महत्वपूर्ण विषय (थीम) पर आधारित रहा।


उल्लेखनीय है कि 24 जून को मनाया जाने वाला ‘विश्व सर्केडियन दिवस’ इसी वर्ष (2026) ‘सोसाइटी फॉर रिसर्च ऑन बायोलॉजिकल रिदम्स’ (SRBR) द्वारा शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मानव शरीर के भीतर 24 घंटे चलने वाली जैविक घड़ी (Biological Clock) के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है, ताकि लोग यह समझ सकें कि हमारे सोने-जागने का चक्र (सर्केडियन रिदम) और प्रकाश का संपर्क हमारे स्वास्थ्य, नींद की गुणवत्ता तथा समग्र कल्याण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
कार्यक्रम का मुख्य विवरण और विशेषज्ञों का विज़न –
भव्य उद्घाटन: कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन प्राणि विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अमिता कनौजिया द्वारा किया गया। इसके उपरांत प्रो. शैली मलिक ने सभी मुख्य अतिथियों, शिक्षकों और शोधार्थियों का स्वागत किया।
क्रोनोमेडिसिन और दीर्घायु पर मुख्य व्याख्यान: कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रोनोमेडिसिन’ के महासचिव तथा सरदार पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के प्रिंसिपल व डीन प्रो. नरसिंह वर्मा रहे। उन्होंने क्रोनोमेडिसिन और स्वस्थ वृद्धावस्था पर गहन प्रकाश डालते हुए बताया कि सर्केडियन रिदम किस प्रकार हमारी नींद, पाचन क्रिया (मेटाबॉलिज्म), हृदय स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करती है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बीमारियों से बचाव, लंबी उम्र और बेहतर जीवन स्तर के लिए शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी के साथ तालमेल बिठाकर जीना अत्यंत आवश्यक है।
🏥 सर्केडियन हेल्थ स्क्रीनिंग एवं जागरूकता शिविर –
कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. शिप्रा भारद्वाज के नेतृत्व में एक विशेष ‘सर्केडियन हेल्थ स्क्रीनिंग और अवेयरनेस कैंप’ का भी आयोजन किया गया।
स्वास्थ्य परीक्षण: शिविर में उपस्थित लोगों के रक्तचाप (Blood Pressure), ग्लूकोज रिदम और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
परामर्श (Counselling): इसके साथ ही विशेषज्ञों द्वारा बेहतर नींद (Sleep Hygiene), भोजन के सही समय (Nutrition Timing) और अनुशासित जीवनशैली को लेकर व्यक्तिगत परामर्श भी दिया गया।
इस सफल आयोजन में विभाग की डॉ. गीतांजलि मिश्रा, डॉ. अलका अग्रवाल, डॉ. मधु गुप्ता, डॉ. अंजली सहित अन्य विभागों के संकाय सदस्य, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम का समापन प्रो. अमित त्रिपाठी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ हुआ। इस अनूठी पहल ने यह संदेश पुरजोर तरीके से प्रसारित किया कि अपनी जैविक घड़ी के अनुरूप जीवन जीना ही स्वस्थ रहने और सुखद बुढ़ापे की असली कुंजी है।



