
✍️ रोहित नन्दन मिश्र –
पलड़ा झाड़ने और अन्य विभाग पर जिम्मेदारी थोपने के अलावा नगर निगम यातायात के अधिकारियों के पास और कोई विकल्प नहीं..!
लखनऊ :- राजधानी लखनऊ में लखनऊ-अयोध्या राष्ट्रमार्ग पर सड़क किनारे लगने वाली अवैध गैर जनपदीय टैक्सियों को खड़ा होने की अनुमति नगर निगम यातायात द्वारा दी गई है। इस मेहरबानी के चलते ना कोई कार्यवाही का डर, ना प्रशासनिक हस्तक्षेप होने का खौफ। ऐसी हालत में पुलिस और यातायात भी पीछे नहीं, हाथ सेकने के लिए हिस्सेदारी बनी हुई है। फर्क इतना पड़ता है लखनऊ नगर निगम यातायात के आदेश से ही जब अवैधता शरण पा रहा हो, तो कार्यवाही का जिक्र कहां से होगा…?
हैरत की बात है इस मामले में सहायक अभियंता नगर निगम यातायात ए के सिंह के मुताबिक कोई आदेश नहीं हुआ, पर जब गंभीरता से पूछा गया कि यह आदेश पुलिस विभाग और यातायात पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के टेबल पर है, तो ना सुनने का बहाना करते हुए अपनी भूमिका और खासियत गिनाना शुरू कर देते हैं। वहीं अन्य अधिकारियों से पूछा जाता है तो वह खानापूर्ति के तौर पर जांच जैसा शब्द का इस्तेमाल करते हैं। एक और हैरत की बात यह भी है कि जब नगर निगम यातायात विभाग में ऐसे आदेश के फाइल का जिक्र किया गया, तो वह मौजूद नहीं है। साफ तौर पर जाहिर है कि लखनऊ अयोध्या राष्ट्रमार्ग पर लगने वाली अवैध गैर जनपदीय टैक्सियों से होने वाले फायदा बतौर एक ठेकेदार के जरिए नगर निगम यातायात के अधिकारियों तक पहुंच रहा होगा। ऐसा इस लिए भी कह सकते हैं क्योंकि जिस व्यक्ति के नाम पर ठेका दिया गया है, वह नगर निगम यातायात अधिकारियों के संपर्क में है…
वहीं नगर निगम यातायात की मेहरबानी और संरक्षण के साथ पुलिस हो या यातायात पुलिस, सब की साठगांठ बखूबी शामिल दिखाई दे रही है। अवैध गैर जनपदीय टैक्सियों का स्टैंड दिया गया है या जिला लखनऊ के अंदर चलने वाली टैक्सियों के लिए स्टैंड हो, नगर निगम यातायात की शरण में गैर जनपदीय टैक्सियां ही फायदा उठा रही हैं। इसके अलावा स्टैंड दिखा कर खड़ी हो रही अवैध गैर जनपदीय टैक्सियां कई जगह पैर पसार रही है। ऐसे में अतिक्रमण फैलाना और अवैध चलन पर प्रशासन कार्यवाही क्यों और कैसे करेगा…?



