✍️आशीष मिश्र

वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिंदी और अन्य भारतीय भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजमुनी ने मॉरीशस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के सफल आयोजन के उपरांत अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इस आयोजन को हिंदी भाषा और साहित्य के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया।

प्रो. राजमुनी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिंदी और अन्य भारतीय भाषा विभाग, साहित्य संचार शोध फाउंडेशन, विश्व हिंदी सचिवालय (मॉरीशस) और हिंदी प्रचारिणी सभा (मॉरीशस) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। इस अकादमिक अनुष्ठान का उद्देश्य दो देशों के बीच साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करना था।
अपने अनुभवों को साझा करते हुए प्रो. राजमुनी ने मॉरीशस के सामाजिक ढांचे और सांस्कृतिक विरासत पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मॉरीशस की सामाजिक संरचना में भारतीय मूल्यों का गहरा समावेश है। वहां की संस्कृति और जीवनशैली में भारतीयता की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है, जो दोनों देशों के अटूट ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करती है। उन्होंने वहां के गिरमिटिया इतिहास और वर्तमान सामाजिक परिदृश्य से जुड़े कई रोचक और ज्ञानवर्धक तथ्य भी पटल पर रखे।
इस अवसर पर विभाग के अन्य शिक्षक और शोधार्थी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया।



