
लखनऊ:- UGC इक्विटी रेगुलेशन्स 2026 समानता के नाम पर सवर्णों के खिलाफ खुला पक्षपात और रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन है। जनरल कैटेगरी को डिफ़ॉल्ट दोषी ठहराना, बेवजह शिकायतों पर कोई सजा न होना, इक्वलिटी कमेटी में सवर्णों का प्रतिनिधित्व न होना, यह संविधान की भावना का अपमान है। तुरंत वापसी हो, निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित हो।
मेढक पानी में आखिरी दम तक उबलता है। यही हाल अनारक्षित वर्ग का है। एक मनगढंत कहानी के तहत तथाकथित ऐतिहासिक अपराध आपके मत्थे मँढ़कर कभी तमाम तरह के आरक्षण , कभी SC ST Act और अब यह UGC की समता समिति का कानून लाया जा रहा है। देश सेवाओं की दक्षता घटने से निरंतर बर्बाद हो रहा है। समाज में आपके प्रति जहर भरा जा रहा है। हिन्दुत्व की एकता को वामपंथियों के “ब्राह्मणवाद मिटाओ” के नैरेटिव में फँसकर छिन्न-भिन्न किया जा रहा है। आप तापमान बढ़ने के साथ अनुकूलित होते रहिए।
कुछ लोग हैं जिन्हें लगता है कि वामपंथियों के “ब्राह्मणवाद – ठाकुरवाद मिटाओ” के फर्जी नैरेटिव पर चलकर केंद्र सरकार देश का उपकार कर लेगी। वामपंथी ब्राह्मणवाद – ठाकुरवाद का नाम लेकर पूरे अनारक्षित वर्ग के विरुद्ध समाज में जहर भरते हैं ताकि देश में योग्य नागरिकों का निर्माण न हो और इनकी देशद्रोह की राजनीति सफल हो जाए।
अनारक्षित वर्ग इस देश की योग्यता का धारक है और व्यवस्था योग्य नागरिक ही बना सकते हैं । बिना व्यवस्था निर्माण के गाँव – गाँव स्वास्थ, शिक्षा आदि समान रूप से पहुंचाना असंभव है जिससे अवसर की समानता एवं हर व्यक्ति की सुनिश्चित गरिमा का संवैधानिक लक्ष्य कभी पूरा नहीं हो सकता। आरक्षण योग्य लोगों को सेवा में आने नहीं देता और आरक्षित वर्ग के भी योग्य बनने की आवश्यकता खत्म करता है। अतः आरक्षण आदि से आरक्षित एवं अनारक्षित हर व्यक्ति का नुकसान है और इससे देश का पतन हो रहा है।
आरक्षण , ST SC Act एवं अब यह UGC की समता समिति वाला एक्ट गलत इस्तेमाल से अनारक्षित वर्ग को हतोत्साहित ही करेगा क्योंकि झूठी शिकायत पर दंड का प्रावधान नहीं है।
अनारक्षित वर्ग को हतोत्साहित करना देश की योग्यता को हतोत्साहित करना है।
यह स्पष्ट होना चाहिए कि हिंदू समाज से भाजपा है , भाजपा से हिंदू समाज नहीं है। वामपंथियों के नैरेटिव में फँसकर हिंदुओं में विभाजन के नित नए कानून बनाना भाजपा को कहीं का नहीं छोड़ेगा।
UGC के नए एक्ट वाली बात कृपया उठाई जाए। समता समिति में सामान्य वर्ग के छात्र की शिकायत पर भी सुनवाई होनी चाहिए और किसी भी कानून में बिना जाँच दंड का प्रावधान न हो । साथ ही झूठी शिकायत करने वाले पर भी कार्रवाई का प्रावधान हो।



