लखनऊपूर्वांचल
Trending

बढ़ती गुमशुदगी और अपहरण की घटनाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, पुलिस कमिश्नर व डीसीपी पूर्वी को किया तलब –

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजधानी लखनऊ के डीसीपी दीक्षा शर्मा से स्पष्टीकरण मागा -

 

✍️ अमित चंद्रा

लखनऊ :- इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी के बढ़ते मामलों और पुलिस की कार्य प्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सख्त रुख अपनाते हुए मामले में पुलिस की लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाते हुए लखनऊ के पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर से स्पष्टीकरण मांगा है और डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा समेत संबंधित अधिकारियों को तलब किया है.

न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई करते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:

  मुख्य बिंदु (कोर्ट का आदेश): विस्तृत रिपोर्ट तलब: – कोर्ट ने लखनऊ के पुलिस कमिश्नर (Amrendra Sengar) से सभी थानों में दर्ज नाबालिग लड़कियों के गायब होने के मामलों का पूरा डेटा और उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है.

डीसीपी पूर्वी को फटकार लगाते हुए पूर्वी जोन (9 थानों) के अंतर्गत 34 नाबालिग लड़कियों के अभी भी लापता होने पर चिंता जताते हुए, डीसीपी (दीक्षा शर्मा) को 3 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है..

  अदालत ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील मामलों की प्रभावी मॉनिटरिंग हो और सभी थाना प्रभारियों, सर्किल ऑफिसर्स ACP व विवेचकों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाल ही में नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामलों पर लखनऊ पुलिस को सख्त फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इस विषय में पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है। बीते कुछ महीनों में लापता होने के मामलों की वृद्धि ने सख्त कदम उठाने की आवश्यकता को उजागर किया है..

कोर्ट ने सख्त आदेश दिया है कि आगामी 10 जून 2026 को होने वाली सुनवाई में डीसीपी पूर्वी, पूर्वी ज़ोन के सहायक पुलिस आयुक्त, संबंधित थाना प्रभारी और जांच अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हों। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी ने डीसीपी पूर्वी को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों पर तीन दिनों के भीतर एक व्यापक और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
एक याचिका सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पूर्वी ज़ोन के 9 थानों के अंतर्गत कुल 81 महिलाओं और बच्चियों के अपहरण या लापता होने के मामले दर्ज थे। इनमें से 66 को बरामद कर लिया गया है, लेकिन 15 नाबालिग लड़कियां अभी भी लापता हैं।
कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस कमिश्नर से लखनऊ के सभी थानों में दर्ज लापता लड़कियों का पूरा डेटा और उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग को आदेश दिया है कि ऐसे संवेदनशील मामलों की जांच के लिए सक्षम अधिकारियों को तैनात किया जाए और बिना किसी ढिलाई के मामलों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताते हुए कहा है कि लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के गुमशुदगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसके कारण पुलिस की बढ़ती लापरवाही पर सवाल उठते हैं।

जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि पुलिस अपनी जिम्मेदारियों को सही से नहीं निभाती, तो अदालत को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता होगी…..

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

You cannot copy content of this page