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दस्तक अभियान का पूर्ण बहिष्कार करेंगी आशा कार्यकत्रियां;कार्य बहिष्कार एवं लंबित मांगों के संबंध में पत्र भेजा  — 

 

 

लखनऊ:-  ऑल आशा एवं आशा संगनी कार्यकर्ती सेवा समिति’ के आह्वान पर सभी जिलों की आशा एवं आश संगिनी बहनों द्वारा आगामी जुलाई माह के दस्तक अभियान का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में संगठन द्वारा 20 जून 2026 को ही पूर्व सूचना पत्र प्रेषित किया जा चुका है। आगामी 10 तारीख से प्रत्येक जिले से कार्य बहिष्कार का औपचारिक पत्र विभाग को सौंपा जा रहा है।

अध्यक्ष पुष्पा तिवारी नें
अत्यंत खेद के साथ कहा कि धरातल पर कड़ा परिश्रम करने के बावजूद आशा एवं आशा संगिनी बहनों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि हमारी निम्नलिखित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए इनका त्वरित निस्तारण करने की कृपा करें:

1. लंबित भुगतान का तत्काल नियमनः वर्ष 2024-25 और 2025-26 का पूर्ण बकाया मानदेय भुगतान अभी तक अप्राप्त है, जिसका संपूर्ण भुगतान तुरंत सुनिश्चित किया जाए।

2. अभियान प्रोत्साहन राशि में वृद्धिः दस्तक अभियान के अंतर्गत दी जाने वाली वर्तमान राशि ₹200 को बढ़ाकर आशा एवं आशा संगिनी दोनों के लिए ₹2,000 प्रति अभियान किया जाए। 3. भत्तों का एकीकरण एवं संशोधनः दस्तक अभियान के अंतर्गत मलेरिया, टीबी तथा विभिन्न अन्य कार्यों के लिए मिलने वाली

छोटी-छोटी प्रोत्साहन राशियों को तुरंत बंद किया जाए, और इसके स्थान पर आशा एवं आशा संगिनी बहनों को एकमुश्त ₹2,000 की सम्मानजनक राशि देने का संशोधन किया जाए।

4. विदित हो कि आज के समय में जब न्यूनतम दैनिक मजदूरी ₹350 से ₹400 है, तब दस्तक अभियान में 4 से 5 घंटे कठिन परिश्रम करने के बावजूद भी हमें महज 26 से ₹7 प्रतिदिन ही भुगतान मिल रहे हैं। यह अत्यंत निराशाजनक है और आशा एवं आशा संगिनी बहनों के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाता है। एक तरफ सरकार महिला सशक्तिकरण और सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली इन महिलाओं के साथ ऐसा असमान व्यवहार हो रहा है।हम विभाग को आश्वस्त करना चाहते हैं कि यदि हमारी इन उचित मांगों को तुरंत मान लिया जाता है, तो हम सभी आशा एवं आशा संगिनी बहनें दस्तक अभियान के कार्य को सुचारू रूप से करने के लिए तत्काल तैयार हो जाएंगी और कार्य करना शुरू कर देंगे। अन्यथा, इस कार्य बहिष्कार के अंतर्गत सभी आशा और आशा संगिनी बहनें अपने-अपने घरों पर ही बैठकर पूर्ण रूप से कार्य का बहिष्कार करेंगी, और इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की असुविधा या विषम परिस्थितियों की सारी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

अतः आपसे पुरजोर अनुरोध है कि हमारी मांगों को स्वीकार कर उचित न्याय प्रदान करें, ताकि भविष्य में राष्ट्रीय अभियानों को सुचारू रूप से चलाया जा सके।

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