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जैविक खाद को लेकर किसान गोष्ठी

 

बांदा। खेती मे लगातार कम हो रही उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए किसानों को जैविक खाद की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि जमीन और स्वास्थ्य दोनो की रक्षा हो सके। इसी को लेकर बड़ोखर खुर्द गांव के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह के बगीचे मे मिट्टी बने सोना के तहत गोष्ठी आयोजित की गयी। जैविक खाद की निर्माता कंपनी तिरंगा ने उपयोग व किसानों को आत्मनिर्भर बनने एवं खाद मे खर्च कम करने के बारे मे विस्तार से जानकारी दी। गोष्ठी मे आये कृषि विशेषज्ञों ने रायायनिक व जैविक खाद के अंतर के बारे मे बताया इसके लाभ एवं हानि से किसानों को अवगत कराया। तिरंगा कंपनी के प्रमोटर सर्वेश सिंधु ने कहा कि जैविक खाद मिट्टी के स्वास्थ्य और उपजाऊपन को बेहतर बनाकर पोषण करता है। मिट्टी मे वायु संचार बढ़ाकर पानी को धारण करने की क्षमता बढ़ाता है साथ ही लाभदायक सूक्ष्म जीवों की मात्रा को बढ़ाता है। इसके उपयोग से मिट्टी मे कार्बन और पौधों का विकास होता है। गोष्ठी मे मौजूद किसानों को जैविक खाद के किट वितरित किए गये ताकि किसान इसका उपयोग कर इसकी क्षमता को जानें। कहा कि इसके बाद वह इस क्षेत्र मे जैविक खाद तैयार करने के लिए एक बड़ा कारखाना लगाएंगे और यहां का कच्चा माल यहीं पर कारखाने मे प्रक्रियागत करके किसानों को जैविक खाद उपलब्ध कराई जाएगी। किसान प्रेम सिंह ने किसानों को रासायनिक खाद से दूर रहकर जैविक खाद अपनाने पर जोर दिया। कहा कि हरियाणा की ओम गु्रप कंपनी यहां का निस्प्रयोज्य कच्चे माल का उपयोग कर जैविक खाद का कारखाना लगाने के लिए प्रयासरत है। जल पुरूष पुष्पेन्द्र भाई ने खेतों मे मेड़बंदी कर पानी एकत्र करने की सलाह दी। कृषक आशीष सिंह, किसान प्रशिक्षण जितेन्द्र गुप्ता, सैयद उस्मान आदि ने संबोधन मे शहरी कचरे के निस्तारण के तरीकों मे बदलाव कर किसानों को उपलब्ध कराई जा रही विधियों सीएनजी आदि के लाभ के बारे मे जानकारी दी। गोष्ठी मे क्षेत्रीय तिंदवारा गांव, अरबई, गुरेह, भरखरी के किसानों ने भाग लिया।

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