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गंगा किनारे ‘हर’ बने ‘हरि’, झूले पर विराजे बाबा विश्वनाथ  –

 

वाराणसी:-  श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर काशी में शिव और कृष्ण के अद्भुत एकत्व का दर्शन हुआ। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास में काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का श्रीकृष्ण के ‘हरि’ स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया।
मोरपंख मुकुट, आकर्षक वस्त्र और बांसुरी की छवि से सजे बाबा विश्वनाथ झूले पर विराजमान हुए तो श्रद्धालु दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हो उठे। त्रिशूलधारी महादेव के इस अनूठे स्वरूप में कैलाश की गंभीरता और वृंदावन की माधुरी एक साथ दिखाई दी। 

इस दौरान बाबा विश्वनाथ को बाल गोपाल के प्रिय माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया गया। परिसर ‘हरे कृष्णा’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।
परंपरा के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में विशेष पूजन हुआ। पंडित सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन कराया। शाम को संजीव रत्न मिश्र ने बाबा का मनोहारी ‘हरी’ स्वरूप में श्रृंगार किया।
भजन और लोकगीतों के बीच काशी ने एक बार फिर संदेश दिया—
रूप अनेक हैं, लेकिन सत्य एक है।
हर बने हरि और हरि में स्वयं हर मुस्कुराते रहे। 🙏

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