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कैसर-ए-हिन्द के मसले पर बवाल, प्रशासन ने दो मकानों को नजूल की सम्पत्ति बताकर मुनादी करवाई –

 

 

वाराणसी:-    बीते शनिवार की शाम को वाराणसी प्रशासन ने दो मकानों को कैसर-ए-हिन्द की सम्पत्ति बताकर मुनादी करवाई और दालमंडी में बवाल हो गया. अश्वनी सिंह और ज़ैद अहमद नाम के दो लोग मकान के कागज़ दिखाते हुए पुलिस के लोगों से मुनादी को गलत बताने लगें और प्रशासन पर गुंडई करते हुए मकान लेने का आरोप लगाने लगें.

बीते शनिवार की शाम को मुनादी हुई कि ‘सीके 39/6 और सीके 39/7 कैसर-ए-हिन्द की जमीन है और इसे अतिशीघ्र खाली कर दिया जाए क्यूंकि 12-1-2026 को इसका ध्वस्तीकरण होना है’. 

“कैसर-ए-हिन्द” शब्द का उपयोग केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली भूमि के लिए राजस्व रिकॉर्ड में किया जाता है. जिसका अर्थ है कि यह भूमि अब केंद्र सरकार की संपत्ति है.

इस मुनादी के बाद सीके 39/6 और सीके 39/7 के दोनों भवन स्वामी मकान के कागज़ और नगर निगम की पक्की नकल दिखाते हुए प्रशासन पर आरोप लगाया कि न तो प्रशासन नगर निगम के पेपर को मान रहा है और ना ही कोर्ट को. 

अश्वनी सिंह और ज़ैद अहमद ने कहा कि कोर्ट ने इनके चार हफ़्ते में जवाब देने के लिए बुलाया था लेकिन ये वहां नहीं गएं और अब ढाई महीने बाद जबरदस्ती मकान पर कब्ज़ा करने चले आए हैं. ज़ैद अहमद ने कहा कि हमारे पास 1927 से मकान के पेपर्स हैं लेकिन ये गुंडई कर रहे हैं. बताइए कि परिवार लेकर मैं कहां जाऊं?

ये कोर्ट और नगर निगम से भी ऊपर हैं. अश्वनी सिंह ने कहा कि प्रशासन आराजी संख्या क्यूं नही बता रहा?

प्रशासन जानबूझकर आराजी संख्या 79/48 और 79/50 में कन्फ्यूजन पैदा कर संदेह का लाभ लेना चाहता है? सही तरीके से आएंगे तो शायद मकान दे भी दूं क्यूंकि विकास के साथ हम भी खड़े हैं. लेकिन चालाकी दिखाएंगे तो ताला बंद कर परिवार लेकर चला जाऊंगा और चूंकि मामला कोर्ट में है इसलिए ये लोग मेरा कुछ कर नही पाएंगे!

सोमवार को ये दोनों मकान टूटने हैं और इसके पहले ही दोनों मकान मालिकों ने वाराणसी प्रशासन और पीडब्लूडी के ख़िलाफ मोर्चा खोल दिया है.

अभी तक दालमंडी में कुल सात मकान तोड़े गए हैं. जबकि बीस से ज़्यादा की रजिस्ट्री हो चुकी है. पचीस से ज़्यादा भवन मालिक रजिस्ट्री के लिए प्रशासन के सम्पर्क में हैं. प्रशासन ने चौड़ीकरण की जद में आ रहे कुल 181 भवन/मकान मालिकों और 6 मस्जिदों को नोटिस दिया है। 

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