कुशीनगर में ‘क्रांति चौक’ पर जंजीरें, श्रद्धालुओं में आक्रोश — खोलने की मांग तेज –
बुद्ध के क्रांति चौक को उपासकों और आम जन के लिए 7 दिन के भीतर खोले जाने हेतु बागी पाण्डेय ने दिया जिला प्रशासन को अल्टीमेटम -

✍️ रोहित नन्दन मिश्र
दलित- क्रांति के चौक (बुद्ध स्क्वायर) को जंजीरों और कंटीले चौकों से बंद करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बुद्ध महापरिनिर्वाण स्थली के मुख्य द्वार माने जाने वाले इस स्थल पर आम अनुयायियों के लिए बंद होने से स्थानीय लोगों और बुद्ध उपासकों में नाराजगी बढ़ रही है।
4 मई को स्मारक को चित्रित करते हुए एक पत्र में मांग की गई थी कि इंडो-श्रीलंका पीस स्क्वायर स्थित इस गोलंबर को जल्द से जल्द खोला जाए, ताकि अंतिम वर्ष के रूप में दर्शन और पूजा- पुरातनता कर सके। पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों द्वारा “जबरन कैद” कर शराब और न्युकेले आयरन के बागानों को घेर लिया गया है, जिससे सामान भारी मात्रा में डूब रहा है।



आवेदनकर्ता ने यह भी कहा कि वह वर्षों से इस स्थल का साफ-सफाई स्वयं कर रही है और अपने जन्मदिन (2 मई) पर भी वह बुद्ध को पुष्प नहीं कर सका। इस स्थिति को “आस्था पर प्रभाव” कहते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई है।




पत्र में सुझाव दिया गया है कि यदि 24 घंटे के लिए ओपनिंग संभव नहीं है, तो कम से कम सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक स्क्वायर को खोज के लिए खोला जाए। साथ ही, एक स्वयंसेवी संगठन द्वारा अपनी देखभाल की जिम्मेदारी लेने का भी वादा किया गया है।
चेतावनी में कहा गया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर चौक का खुलासा नहीं किया गया, तो रैंक कार्यालय के सामने सूचना दी जाएगी, जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस मामले में पूरे जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



