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कुंठा वाले कुंडा जाकर हृदय को निर्मल करें

 

सामूहिक विवाह केवल एक विवाह नहीं है अपितु उन समस्याओं का समाधान भी है जिनका सामना आर्थिक रूप से कमजोर हिन्दू परिवार करता है। ऐसे परिवार जिनमे या तो कोई संरक्षक नहीं है या आर्थिक समृद्धता नहीं है उन परिवारों में सबसे बड़ी चुनौती बिटिया का विवाह करना है। जात – पात की बात तो बहुत होती हैं पर जब बात गरीब की बिटिया के विवाह की होती है तो सहजाति के लोग भी साथ नहीं देते लेकिन प्रतापगढ़ जिले के कुंडा विधानसभा में एक अनोखा या कहें की अकल्पनीय कार्य देखने को मिलता है। परम पूजनीय देवराहा बाबा के स्मृति और आशीर्वाद से कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने अपने सहयोगियों और पारिवारिक सदस्यों के साथ मिलकर 101 दूल्हों की बारात का भव्य स्वागत करके 101 कन्याओं के विवाह का सफल आयोजन किया। देखा जाए तो जब लोकतंत्र नहीं था तब राज परिवार इस प्रकार के सेवार्थ कार्य निरंतर करते थे जिससे क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में किसी रोगी के उपचार या कन्या विवाह की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ता था पर अब इस परम्परा का निर्वहन बहुत ही कम लोग करते हैं, धन और सामर्थ्य की अधिकता होने के पश्चात भी लोग सामाजिक उत्थान के विषय में नहीं सोचते हाँ प्रदेश सरकारें सामूहिक विवाह का आयोजन अवश्य करती रहती हैं पर जनप्रतिनधि व्यक्तिगत तौर पर इस प्रकार के सेवार्थ कार्य करने  से नदारद ही रहते हैं। लेकिन   इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया ने जिन  कुंडा विधायक राजा भैया को कभी बाहुबली और न जाने क्या क्या कहके दुष्प्रचार किया था  सोशल मीडिया आने के पश्चात राजा भैया के सेवार्थ कार्य जन जन तक पहुँच रहे हैं जो आज से नहीं बल्कि भदरी परिवार द्वारा दशकों से अनवरत चल रहे हैं।  हाँ यह बात जरूर है की विरोधीगण अपनी कुंठित मानसिकता से ग्रसित होकर राज परिवारों पर शाब्दिक हमले करने का प्रयास करते रहते हैं पर सत्यता तो यह है की परिवार का केवल एक व्यक्ति जो अपने परिवार का पोषण करता है वह भी अपने परिवार के लिए राजा होता है तो जब रघुराज प्रताप सिंह अपने क्षेत्र की ही नहीं अपितु अपने संज्ञान में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सहायता हेतु अग्रसर रहते हैं तो लोग उन्हें प्रेम पूर्वक,राजा,सरकार, श्रीमंत, महाराज आदि सम्मानजनक शब्दों से संबोधित करते हैं।  “अब जिनके मन में कुंठा है तो उनसे निवेदन है वो कुंडा जाएँ जनता से मिले और उनके स्नेह से अपने मन का उपचार करें”

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