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जलवा रेस्टुरेंट में हुई घटना का सफल अनावरण के बाद भी क्यों हटा दिए गए थाना प्रभारी विभूति खंड और सहायक पुलिस आयुक्त विभूति खंड…?

अधिक परिश्रम के बाद भी क्या उच्च अधिकारी थाना प्रभारी विभूति खंड एवं थाना प्रभारी गोमतीनगर विस्तार से संतुष्ट नहीं थे...?

 

  

 

लखनऊ :-   राजधानी लखनऊ में पुलिस उपायुक्त पूर्वी दीक्षा शर्मा द्वारा थाना विभूति खंड क्षेत्र स्थित जलवा रेस्टुरेंट में हुई घटना का सफल अनावरण के बाद भी प्रेस कॉन्फ्रेस क्यों नहीं किया गया…?, हालांकि थाना प्रभारी विभूति खंड की कार्यशैली पर कोई सवाल नहीं उठ रहा था, फर्क इतना था कि क्षेत्र का भ्रमण देर रात तक जरूर करते थे पर दिखावा नहीं करते थे…

  आज का ज़माना कहता है जो दिखता है वो ही समझा जाता है, असत्य को, भले ही सत्य बना दिया जाए, सत्य को भले असत्य बना दिया जाए, पर मेहनत करो या ना करो, आज दिखावा मायने रखता है। थाना विभूति खंड के अलावा थाना प्रभारी गोमतीनगर विस्तार भी लाइन हाजिर हुए, पर इत्तेफाक की बात है थाना प्रभारी विभूति खंड और थाना प्रभारी गोमती नगर विस्तार दोनों ही मेहनत के साथ-साथ अपने क्षेत्र में नियंत्रण रखने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। अपनी भूमिका एक अच्छे थाना प्रभारी के रूप में निभा रहे थे। बात किया जाए पूर्वी क्षेत्र के अन्य थानों की, तो थाना गोमतीनगर के कुछ हिस्से, थाना चिनहट क्षेत्र, थाना बीबीडी क्षेत्र आदि में थाना प्रभारी अपने क्षेत्र में नियंत्रण रखने में एवं कानून व्यवस्था बरकरार रखने में बिल्कुल असफल रहे हैं, पर फिर भी उच्च अधिकारियों की नजर के आंख के तारे बने हुए हैं। अतिक्रमण भरा हुआ है, कानून व्यवस्था की रोजाना धज्जियां भी उड़ रही है पर फिर भी आंख के तारे बने हुए हैं…

  थाना चिनहट प्रभारी की कार्यशैली पर लगातार सवाल जरूर उठता आया है..?, पर फिर भी उच्च अधिकारी संतुष्ट, क्यों…?, पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के पूर्वी क्षेत्र में विभूति खंड, गोमतीनगर विस्तार एवं कुछ ऐसे थाने हैं जो दिखावा नहीं करते, पर हां समय समय पर कोई न कोई पत्रकार उनकी बेहतरीन भूमिका को दर्शाने की कोशिश जरूर करता रहा है। हालांकि उच्च अधिकारियों की नजर में दिखावा अधिक जरूरी हो गया है, तभी चौकी प्रभारी द्वारा क्षेत्र में कानून व्यवस्था बरकरार रखने में असमर्थता पर भी उच्च अधिकारी क्यों नहीं संज्ञान में लेते…?

   जो पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के पूर्वी क्षेत्रों में उपस्थित उप निरीक्षक तैनात हैं, वे अगर क्षेत्र में अनुशासनहीनता, अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं, उन पर संज्ञान क्यों नहीं लिया जाता…?

  अच्छी भूमिका और प्रयत्नशील कार्य शैली पर कार्यवाही करना कहां का न्याय है…?, ऐसे में यही कहा जा सकता है की आज का ज़माना मेहनत और लगन का नहीं, सिर्फ और सिर्फ दिखावे का है….

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