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शंकराचार्य को धमकी मामले में पुलिस की शिथिल कार्यप्रणाली के विरुद्ध रोष –

✍️ नवीन तिवारी

वाराणसी :- शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्या मठ में एक उच्च-स्तरीय आपातकालीन बैठक संपन्न हुई। बैठक में धर्म ध्वजा के रक्षक और ज्योतिषपीठ के पीठाधीश्वर परमआराध्य परमाधीश जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी और उसके पश्चात वाराणसी प्रशासन, विशेषकर भेलूपुर थाना पुलिस की संवेदनहीनता व संदिग्ध भूमिका पर गहरा रोष व्यक्त किया गया।

 

प्रशासनिक उदासीनता और कार्यशैली पर गंभीर प्रहार: –

बैठक में उपस्थित विद्वानों और विधि विशेषज्ञों ने पुलिस की शिथिलता को उजागर करते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे:

• अधिवक्ता रमेश उपाध्याय: बैठक का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम से धमकी मिलने के बावजूद पुलिस द्वारा IT Act की धाराओं को सम्मिलित न करना प्रशासन की ‘अति-संवेदनहीनता’ और कानूनी तथ्यों को दबाने का कुत्सित प्रयास है।

 

प्रशासन की मंशा पर सुलगते प्रश्न: –

विज्ञप्ति के माध्यम से प्रशासन से सीधे प्रश्न पूछे गए हैं: –

1. विलंब का उत्तरदायी कौन?: संज्ञेय अपराध की सूचना के बाद भी FIR दर्ज करने में ४८ घंटे क्यों व्यर्थ किए गए? क्या यह समय आरोपी को सुरक्षित पलायन हेतु प्रदान किया गया था?

2. कमजोर धाराओं का षड्यंत्र: क्या रसूखदार आरोपियों को विधि सम्मत लाभ पहुँचाने के लिए जानबूझकर धाराओं को हल्का रखा गया है?

3. पुलिस की अक्षमता: पुलिस की नाक के नीचे से आरोपी का अब तक लापता होना वाराणसी पुलिस की कार्यकुशलता पर एक अमिट कलंक है।

वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीकांत त्रिपाठी जी की अध्यक्षता एवं नेतृत्व में शासन-प्रशासन से निम्नलिखित माँगें की हैं: – 

 

• मामले की पराकाष्ठा को देखते हुए FIR में तत्काल कठोरतम धाराओं का संशोधन किया जाए।

• आरोपी की अविलंब गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।

• कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही बरतने वाले भेलूपुर थाने के उत्तरदायी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्यवाही हो।

साथ ही साथ उपस्थित सभी विद्वानों और विधि विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा की जगतगुरु शंकराचार्य जी करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं। उनके प्रति यह प्रशासनिक धृष्टता पूरे हिंदू समाज का अपमान है। यदि शीघ्र ही न्यायसंगत और कठोर कार्यवाही सुनिश्चित नहीं हुई, तो समस्त हिंदू समाज सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन हेतु बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण उत्तरदायित्व वाराणसी प्रशासन का होगा।

इस महत्वपूर्ण सभा में मुख्य रूप से साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, प्रभु नारायण (पूर्व अध्यक्ष, सेंट्रल बार एसोसिएशन), विनोद शुक्ल (अध्यक्ष, बनारस बार एसोसिएशन), कमलेश यादव (पूर्व महामंत्री, बनारस बार एसोसिएशन),वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीकांत त्रिपाठी , अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, अधिवक्ता अनिल यादव, अधिवक्ता अभय शंकर तिवारी जी,श्री एस.के. द्विवेदी, अनिल पाठक , गिरीश तिवारी ,यतींद्र चतुर्वेदी,श्रीमती सावित्री देवी, यतींद्र चतुर्वेदी व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में इस घटना की निंदा की —

उक्त जानकारी देते हुए शंकराचार्य महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा कि भारत सरकार सनातनियों के भावनाओं को ध्यान में रखकर अविलंब परमधर्माधिश शंकराचार्य जी महाराज को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान करे।आखिर जब एक से एक अनुपयोगी स्वयंभू संस्थाओं के प्रमुखों को सुरक्षा दी जा सकती है तो भारत में सौ करोड़ सनातनियों के प्राणवायु

शंकराचार्य को सुरक्षा क्यों नही दी जा रही है?अगर कुछ अनहोनी हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी??

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